गुवाहाटीः असम में सरकारी, सत्र और वन भूमि को खाली कराने का काम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में रहने तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि जमीन खाली कराने का काम जारी रहेगा। हम बटद्रवा सहित राज्यभर में सरकारी और वन भूमि को खाली कराएंगे। सत्र (वैष्णव मठ)असम के लोगों की संस्कृति व पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान, उन्हें सत्रों की जमीन खाली करनी होगी। हम सभी से अतिक्रमण वाली जमीन खाली करने का आग्रह करते हैं,नहीं तो हमें उसे खाली करवाना पड़ेगा। हम बटद्रवा सहित राज्यभर में सरकारी और वन भूमि को खाली कराएंगे। मुख्यमंत्री डॉ.शर्मा ने सदन को यह भी बताया कि सरकारी जमीन से हटाए गए कई लोग, जो  वास्तव में भूमिहीन थे, उन्हें सत्यापन के बाद सरकार की ओर से विभिन्न स्थानों पर जमीन के पट्टे दिए गए हैं। जब कांग्रेस विधायक रकिबुल हुसैन ने दावा किया कि हटाए गए लोग खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं और तालाबों का पानी पी रहे हैं तो मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि असमिया लोग युगों से ऐसे पानी का उपयोग करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपने चुनाव घोषणापत्र में कहा था कि अतिक्रमण करने वाले हमारी जिम्मेदारी नहीं हैं। मैं हमेशा कहता हूं कि हमें  उनके वोटों की जरूरत नहीं है, लेकिन कांग्रेस ने चर (नदी के द्वीपों) का सर्वेक्षण क्यों नहीं किया? जिन लोगों को जमीनों से हटाया गया, उनमें से अधिकांश बांग्ला भाषी मुसलमान हैं। कांग्रेस ने 75 सालों से उनलोगों के कल्याण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया, जबकि उनके साथ वोट की राजनीति की है। अब उसे शरण देना कांग्रेस की जिम्मेवारी है।  हालांकि असमिया सहित कई अन्य जातीय समूह भी प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए गौहाटी उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया और कहा कि अगला बड़ा अभियान निचले असम के ग्वालपाड़ा जिले में चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बटद्रवा के लोगों ने लगातार कांग्रेस को वोट दिया। पार्टी ने पिछले 75 वर्षों में  लोगों को जमीन के पट्टे क्यों नहीं दिए? वे सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को जमीन का अधिकार दे सकते थे। तब हम उन्हें नहीं हटाया होता। मुख्यमंत्री ने बटद्रवा कीकांग्रेस विधायक  से जमी से हटाये गए लोगों में से वास्तविक भूमिहीनों की पहचान करने और उन्हें  पट्टा  प्राप्त करने के लिए मिशन वसुंधरा के तहत आवेदन करने में मदद करने को कहा। उन्होंने कांग्रेस विधायकों से सवाल किया कि क्या उन्होंने पीड़ितों की असुरक्षा के साथ राजनीति करने के बजाए सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान उनके लिए कुछ नहीं करने के लिए बटद्रवा, गोरुखुटी और अन्य स्थानों से निकाले गए लोगों से माफी मांगी। असम में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में लौटने के बाद से राज्य में अतिक्रमण रोधी कई अभियान चलाए गए हैं।  मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि वहां से जिन लोगों को हटाया गया, वे भूमिहीन नहीं हंै। दो-दो हजार बीघा जमीन दखल करने वाले लोग भूमिहीन कैसे हो सकते हैं। कांग्रेस लोगों को उत्तेजित कर माहौल खराब कर राजनीतिक रोटी सेंकने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने एक विशेष वर्ग को निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर बच्चे अधिक पैदा करेंगे तो भविष्य में इससे भी बड़ी समस्या खड़ी होगी। लोगों को मौलिक सुविधा मुहैया कराना मुश्किल हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्य के साथ सीमा विवाद पर सदन को बताया कि असम सरकार सभी पड़ोसी राज्य के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत के माध्यम से विवादों को निपाटारा करने में लगी है। उन्होंने कहा कि पहली असम सरकार ने मिजोरम से 1800 हेक्टर जमीन लाने में सक्ष्म हुआ। अन्य समस्या भी समाधान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि जनवरी में वसंुधरा दो की अंतिम तिथि खत्म होने वाली थी, लेकिन राज्य सरकार ने जमीन की समस्याओं को समाधान करने के साथ ही भूमिहीनों को जमीन का पट्टा देने के मद्देनजर अब 31 मार्च, 2023 तक आवेदन देने की अंतिम तारीख तय की गई है।