गुवाहाटी : अपनी कहानियों के माध्यम से एक अलग दुनिया बनाने वाले कथाकार, कहानीकार और सबसे ऊपर एक पत्रकार के रूप में असम के मीडिया जगत में एक ट्रेंड सेटर की भूमिका निभाने वाले मनोज कुमार गोस्वामी को इस वर्ष के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार हेतु चयनित किया गया है। वृहस्पतिवार शाम सार्वजनिक हुई इस खबर ने उनके हजारों प्रशंसकों को उल्लासित कर दिया। साथी और युवा पत्रकारों और कहानी के शौकीनों के बीच अक्सर बहस और चर्चा होती है कि क्या मनोज कुमार गोस्वामी एक पत्रकार के रूप में अधिक कुशल हैं या उनके द्वारा लिखी गई कहानियां उनके द्वारा लिखी गई ख़बरों से बेहतर हैं या नहीं। हालांकि आज मनोज कुमार गोस्वामी की कहानियों के चाहने वालों की जीत हुई है। मनोज कुमार गोस्वामी अपनी लघुकथा पुस्तक भूल सत्य के माध्यम से देश के सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक पुरस्कारों में से एक साहित्य अकादमी पुरस्कार हासिल करने में कामयाब रहे। गौरतलब हैं कि अब तक लघुकथाओं की 10 पुस्तकों से पाठकों को मंत्रमुग्ध कर चुके मनोज कुमार गोस्वामी लंबे समय से ऐसी खबरों का इंतजार कर रहे थे। आज इस बहुप्रतीक्षित खबर ने सचमुच उनके पाठकों के बीच हलचल मचा दी है। मुख्यधारा का मीडिया और सोशल मीडिया तुरंत खबरों से भर जाता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जब मनोज कुमार गोस्वामी ने सुना कि उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है तो वे कितने खुश थे,क्योंकि सोशल मीडिया पर वायरल खबरों से पता चलता है कि उनकी कहानियों के प्रशंसक उनसे ज्यादा प्रभावित थे। लोकप्रिय कहानी अनादि के लेखक मनोज कुमार गोस्वामी द्वारा लिखे गए कई अलग-अलग प्रकार के उपन्यास हैं। पाठकों के बीच इस बात को लेकर बहस आज भी जारी है कि अनादि लोकप्रिय है या समीरन बरुवा। लेकिन वह हमेशा की तरह इस तरह के सवालों के प्रति उदासीन रहे। इतने उदासीन होने के कारण ही वे असम साहित्य सभा द्वारा दिए जाने वाले साहित्य सम्मान पुरस्कार को अस्वीकार कर सके। उन्हें 1994 में रचनात्मक कहानी के लिए कथा पुरस्कार और साहित्यिक कार्य के लिए संस्कृति पुरस्कार भी मिला। इस प्रतिष्ठित लेखक-पत्रकार के लेखन का पहले ही विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। उनका लेखन पेंगुइन जैसे प्रसिद्ध प्रकाशनों द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया है। उनकी कहानियों की किताब, मपेट एंड अदर स्टोरीज, हाल ही में प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड द्वारा लॉन्च की गई थी। गुवाहाटी विश्वविद्यालय में भौतिकी के छात्र गोस्वामी, जिन्होंने कुछ समय के लिए एक शिक्षक के रूप में एक सुरक्षित कैरियर बना लिया था, शायद समानांतर रेखांकन जैसे करियर के प्रति आकर्षित नहीं थे। इसलिए उन्होंने उस सुरक्षित पेशे को छोड़ने का साहस किया और पत्रकारिता के कांटेदार रास्ते पर पैर रखा। 1987 में प्रसिद्ध पत्रकार चंद्र प्रसाद सैकिया के नेतृत्व में गोस्वामी ने नतून दैनिक में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत से ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने असम के पत्रकारिता क्षेत्र में सिर्फ लक्ष्यहीन रूप में भटकने के लिए प्रवेश नहीं किया था। पूर्व प्राध्यापक व सत्राधिकार दिवंगत कमल चंद्र गोस्वामी व लखिमी गोस्वामी के पुत्र मनोज कुमार गोस्वामी विगत 12 वर्षों से राज्य में कई सैटेलाइट चैनल के प्रधान संपादक थे, वे अभी भी आमार असम के प्रधान संपादक हैं और एक अन्य टेलीविजन चैनल, एनके टीवी के भी मुख्य संपादक हैं। एक पत्रकार और साहित्यकार के रूप में अपने व्यस्त करियर के बीच गोस्वामी ने संयुक्त राज्य अमरीका में संघर्ष समाधान विषय में मीडिया की भूमिका पर प्रशिक्षण लिया और मास्को में रूसी टेलीविजन नेटवर्क (आरटी) पर एक कोर्स पूरा किया। वे कई लोकप्रिय टेलीविजन कार्यक्रमों के पृष्ठभूमि निर्माता हैं। गोस्वामी ने एक पत्रकार के रूप में दुनिया भर के लगभग 65 देशों की यात्रा की। गोस्वामी की डॉक्यूमेंट्री अंसू-एवरेस्ट कॉलिंग पहले ही कई अंतराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही जा चुकी है। आमार असम के सभी कर्मचारी, निदेशक मंडल और युवा पत्रकार मनोज कुमार गोस्वामी को आज उनके कार्यालय में एक विशेष समारोह में सम्मानित किया। कहने की आवश्यकता नहीं कि अपनी अप्रतिरोध्य यात्रा के रजत जयंती वर्ष को पार कर चुके आमार असम का एक-एक शब्द पाठकों के मन को छूता है, प्रत्येक वाक्य ने पाठकों के मस्तिष्क को झकझोर कर रख देता है और प्रत्येक समाचार लेख ने अप्रत्याशित रूप से आश्वस्त करने वाला वातावरण निर्मित करता है। मनोज गोस्वामी को असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा, केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल और अखिल असम छात्र संघ (आसू) के मुख्य सलाहकार समुज्ज्वल भट्टाचार्य ने ट्वीट कर बधाई दी। मनोज कुमार गोस्वामी की साहित्यिक कृतियों में कहानी की किताबें ईश्वरहीनता, समीरन बरुवाा आ रहा है, मैं राजेन बरुवा का समर्थन करता हूं, स्वाधीनता, पृथिवीर शेष स्टेशन, प्रेमहीनता, एल्युमिनियम की अंगुली, जीवन डॉट कॉम, भूल सत्य, वायरस और अन्य कहानियां, लेख ट्रेपेज़ियम, पांचजन बंधु, राजनीतिर अलिये गलिए : ऑफ द रिकॉर्ड, यात्रा वृतांत भल्गा एखन नदीर नाम, उपन्यास अनादि और अन्यान्य, कहानी का अंग्रेजी में अनुवाद मपेट एंड अदर स्टोरीज, बंगाली में अनुदित मनोज कुमार गोस्वामी द्वारा लघु कथाएं भी उल्लेखनीय हैं।
आमार असम के प्रधान संपादक मनोज गोस्वामी को साहित्य अकादमी सम्मान