गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने रविवार को कहा कि राज्य के लोगों को प्रतिबंधित अल्फा (आई) के प्रमुख परेश बरुवा पर इस बात के लिए ‘नैतिक दबाव’ बनाना होगा कि वह सम्प्रभुता की मांग करना छोड़ दें। उन्होंने कहा कि लोगों को बरुवा को यह मांग छोड़ने के लिए मनाना होगा ताकि इतिहास उन्हें धोखेबाज ना कहे। सीएम ने आज रविवार को उपरोक्त आशय की बातें नववर्ष-2023  के पहले दिन वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत में कही। मौके पर उपस्थित पत्रकारों से गुफ्तगू करते हुए सीएम ने कहा कि  सरकार की कोशिशें जारी हैं। हमने दरवाजे खुले रखे हैं। कुछ बिन्दुओं पर मतभेद है तो कुछ पर सहमति भी है। हमें उम्मीद बनाए रखनी चाहिए। शर्मा ने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में समस्या यह है कि बरुवा सिर्फ सम्प्रभु असम की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते मैंने सम्प्रभुता और अखंडता की रक्षा करने की संविधान की शपथ  ली है। शर्मा ने कहा कि मैंने जो शपथ ली है उससे पीछे नहीं हट सकता हूं या फिर मैं पद पर नहीं रहूंगा। मुझे लगता है कि वह भी अपनी मांग से पीछे नहीं हट सकते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि असम में उग्रवाद से जुड़ी हिंसक घटनाओं में करीब 10,000 लोगों की मौत के बाद लोग उन्हें धोखेबाज मानेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्तर पर पहुंच कर मतभेद समाप्त होने लायक नहीं हैं। इसलिए यह बुद्धिजीवियों और विभिन्न संगठनों सहित जनता की जिम्मेदारी है कि वे उनसे सम्प्रभुता की मांग छोड़ने का आग्रह करें। उन्होंने कहा कि उन पर (परेश बरुआ पर) नैतिक दबाव बनाया जाना चाहिए  ताकि वह सम्प्रभुता की मांग छोड़ दें, ऐसे में इतिहास उन्हें धोखेबाज नहीं मानेगा। उन्होंने कहा कि अल्फा (आई) के साथ बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं।