रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरक्षण संशोधन विधेयकों पर राज्यपाल की सहमति में कथित देरी को लेकर मंगलवार को राजभवन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजभवन ने राज्य सरकार से सवाल पूछकर अपनी संवैधानिक शक्तियों से बाहर जाकर काम किया है। बघेल ने कहा कि राज्यपाल अनुसुइया उइके या तो विधेयकों पर हस्ताक्षर करें या उन्हें राज्य सरकार को लौटा दें। मुख्यमंत्री ने रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आज कांग्रेस के जन अधिकार महारैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आरक्षण के पक्ष में उनकी सरकार की पहल के बारे में जानकारी दी तथा पिछले महीने विधानसभा द्वारा पारित दो आरक्षण संशोधन विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी में देरी को लेकर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरा। बघेल ने इस दौरान विपक्षी दल भाजपा पर राजभवन के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लोगों को आरक्षण का लाभ लेने से रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया। छत्तीसगढ़ विधानसभा में तीन दिसंबर को छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक, 2022 और छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) संशोधन विधेयक 2022 पारित किया गया था। विधेयकों के अनुसार राज्य में अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। विधेयकों पर राज्यपाल की सहमति में देरी ने राजभवन और राज्य सरकार के बीच तनाव को बढ़ा दिया है।
राजभवन ने संवैधानिक शक्तियों से बाहर जाकर किया काम : बघेल