वृक्षारोपण अभियान के लिए ट्री-मैन के नाम से प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी दीपक रमेश गौड़ ने अपनी जिजीविशा से सड़क दुर्घटना के आघात को पीछे छोड़ते हुए नए साल में पर्यावरण संरक्षण का अभियान फिर से शुरू करने का संकल्प लिया है। गौड़ ने  कहा कि मैं अपनी बची हुई शारीरिक शक्ति को पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संरक्षण में खपाना चाहता हूं। गौड़ (उम्र-44 साल) को वर्ष 2010 में एक सड़क हादसे में गंभीर चोटें आईं थी, जिससे वे शारीरिक रूप से निःशक्त हो गए थे, पर उन्होंने प्रकृृति के संरक्षण के प्रति अपने समर्पण में कोई कमी नहीं आने दी। एक दशक के लम्बे अंतराल के बाद उन्होंने बची हुई शारीरिक क्षमता को पुनः पर्यावरण संरक्षण में लगाने का संकल्प लिया है। वृक्षारोपण के लिए लोगों को पौधे भेंट करने के अपने अभूतपूर्व अभियान के लिए लिमका बुक आफ रिकार्ड में दर्ज श्री गौड़ खुद यूनीवार्ता कार्यालय चल कर आए थे। उन्होंने बातचीत में कहा कि गिफ्ट ए ट्री, गिफ्ट ए लाइफ (वृक्ष का दान, जीवन दान) है। अगर हमें वाकई में पर्यावरण को बचाना है तो प्राकृृतिक हरियाली को बचाना होगा और पर्यावरण को संरक्षित करना होगा। उन्होंने नए वर्ष में लोगों से अधिकाधिक संख्या में पेड़ लगाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज जब अंधाधुंध वैज्ञानिक विकास के दौर में प्रदूषण से जहां पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है, ऐसे में पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी न केवल भारतवर्ष बल्कि भूमंडलीय जिम्मेदारी बन गई है।  गौड़ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने का काम केवल सरकारों का नहीं है, इसमें जन भागीदारी भी जरूरी है। दीपक रमेश गौड़ अपने हौसले के बल पर आज भी खड़ा हैं और पर्यावरण को बचाने का अभियान चलाने की खातिर इन्हें ट्री-मैन की संज्ञा दी गई। दस लाख से अधिक पौधे का उपहार दे चुके दीपक का नाम उनके इस कार्य के लिए कई बार लिमिका बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज हुआ है। वह कहते हैं कि राजनीतिक पार्टियों को भी अपने एजेंडा मे पर्यावरण को लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे हमारे सबसे बड़े मित्र हैं, जीवन के जितने भी रंग होते हैं, उसकी झलक हमें पेड़ पौधे में देखने को मिल सकती है।