इंदौरः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि पिछले आठ साल के दौरान राजनीतिक स्थिरता और सतत सुधारों के चलते भारत निवेश की आकर्षक मंजिल बन चुका है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि वे भारत में स्वास्थ्य, कृृषि, पोषण, कौशल विकास, नवाचार तथा हरित हाइड्रोजन सरीखे क्षेत्रों में उभर रही संभावनाओं को भुनाएं और देश के साथ मिलकर नई वैश्विक आपूर्ति शृंखला के निर्माण में शामिल हों। मोदी ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इंदौर में आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मेलन ‘इन्वेस्ट मध्यप्रदेश’ के उद्घाटन सत्र को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि देश 2014 से ‘रिफॉर्म’ (सुधार), ट्रांसफॉर्म (परिवर्तन) और परफॉर्म (प्रदर्शन) के रास्ते पर चल रहा है। उन्होंने गुजरे वक्त में कोविड-19 के भीषण प्रकोप की ओर परोक्ष इशारा करते हुए कहा कि यहां तक कि सदी में एक बार सामने आने वाले भीषण संकट के दौरान भी हमने सुधारों की राह नहीं छोड़ी। आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देश में सुधारों को बड़ी गति दी है। नतीजतन आज भारत निवेश की एक आकर्षक मंजिल बन चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य, कृृषि, पोषण, कौशल विकास, नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं आपका (निवेशकों का) इंतजार कर रही हैं। यह भारत के साथ मिलकर एक नई वैश्विक आपूर्ति शृंखला के निर्माण का समय है। मोदी ने कहा कि सरकार ने कुछ दिन पहले ही आठ लाख करोड़ रुपए के संभावित निवेश वाले मिशन ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ को हरी झंडी दी है ताकि इस हरित ईंधन की वैश्विक मांग को पूरा किया जा सके। उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे सरकार के इस महत्वाकांक्षी अभियान में अपनी भूमिका तलाश करें। प्रधानमंत्री ने सड़कों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के विस्तार के साथ ही औद्योगिक गलियारों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के विकास की विभिन्न योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि देश का आधुनिक और बहुस्तरीय बुनियादी ढांचा निवेश की नई संभावनाओं को जन्म दे रहा है। मोदी ने बताया कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत 2.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की सरकारी मदद की घोषणा की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह योजना दुनियाभर के विनिर्माताओं के बीच चर्चा में है और इसके तहत देशभर में अबतक अलग-अलग क्षेत्रों में लगभग चार लाख करोड़ रुपए मूल्य का उत्पादन हो चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना के चलते मध्यप्रदेश में भी सैकड़ों करोड़ रुपए का निवेश आया है और सूबे को दवा तथा वस्त्र उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने में इस योजना का बड़ा महत्व है।