गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने शुक्रवार को कहा कि असम सरकार राज्य के सभी जनजातीय समूहों की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने को प्रतिबद्ध है। मोरीगांव जिले के  ऐतिहासिक गोभा देवराजा के जोनबिल मेले के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार असम के सभी जनजातीय समूहों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को और बढ़ावा देने के प्रति ‘बेहद संवेदनशील’ है। हम तिवा सहित सभी जनजातियों की संस्कृति के संरक्षण के लिए हरसंभव प्रयास करने को प्रतिबद्ध हैं।

गौरतलब है कि तिवा समुदाय के तीन दिवसीय इस अनूठे मेले में खरीदारी के  लिए वस्तुओं का विनिमय किया जाता है।  शर्मा ने कहा कि व्यापार की वस्तु विनिमय प्रणाली, करों के संग्रह और तिवा सम्राट गोभा राजा के राज दरबार के आयोजन करने की प्रथाएं जैसी पारंपरिक विशेषताओं के कारण इसे राज्य की सबसे विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं में से एक माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि पहाड़ों और मैदानों की विभिन्न जातियों के बीच परस्पर संवाद के लिए एक मंच प्रदान करने में जोनबिल मेले का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मेल-मिलाप की प्रक्रिया से धीरे-धीरे भाईचारे के संबंधों में वृद्धि हुई और विभिन्न जातीय समुदायों के बीच पूर्वाग्रह दूर हुए हैं।

डॉ. शर्मा ने  कहा कि जोनबिल मेले का सदियों तक अपने मूल रूप में जारी रहना तिवा समुदाय के सदस्यों द्वारा अपनी विरासत और संस्कृति को दिए जाने वाले महत्व का प्रकटीकरण है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तिवा राजाओं को राजभट्टा भी सौंप दिया। तिवा समुदाय के सदस्यों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जोनबिल मेला समिति को जल्द से जल्द 20 बीघा जमीन उपयुक्त स्थान पर आवंटित की जाएगी, ताकि अगले साल से उस स्थान पर इस परंपरा का पालन किया जा सके। 

मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने आदिवासी समुदायों के सदस्यों से वसुंधरा 2.0 योजना के तहत अपनी भूमि को अपने नाम दर्ज कराने की भी अपील की, जिससे आदिवासी लोगों को उनके नाम पर 50 बीघा तक जमीन रखने की अनुमति मिलती है।  मुख्यमंत्री ने तिवा आबादी से अपनी संस्कृति और पहचान से जुड़े रहने और धर्म परिवर्तन की प्रवृत्ति से दूरी बनाए रखने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यदि वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से अपना संपर्क खो देती है तो जातीयता की भावना लंबे समय तक नहीं रहती है। इस अवसर पर मोरीगांव जिले के अभिभावक मंत्री पीयूष हजारिका, लाहोरीघाट विधायक डॉ. आसिफ मोहम्मद नज़र, मोरीगांव विधायक रमाकांत देउरी, तिवा स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी जीवन चंद्र कोंवर, कार्बी आंग्लांग स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी तुलीराम रोंगहांग भी उपस्थित थे।