डिजिटल डेस्क: हाल ही में मेघालय में चुनावों का ऐलान हुआ हैं,लेकिन पिछले तीन महीने से राजनीतिक पार्टियां चुनावी मोड में हैं,60 सीटों वाले मेघालय की 40 सीटों पर कांग्रेस ने उम्मीदवार तय कर दिए हैं, वहीं नेशनल पीपुल्स पार्टी ने भी 58 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। 2018 चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 21 सीटें जीती थीं,उसके बावजूद 31 के जादुई आंकड़े से दूर रह गई और सरकार नहीं बना पाई, 19 सीटें पाने वाली एनपीपी पीडीएफ और एचएसपीडीपी के साथ मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) का गठन कर सरकार बनाई थी।महज 2 सीट पाने वाली बीजेपी भी एमडीए के साथ हो गई थी। हालांकि इस बार बीजेपी कुछ बड़ा करना चाहती है,अब इसे में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को जिम्मेदारी दी गई है।
मेघालय विधानसभा चुनाव में हिमंत बिस्वा सरमा का अहम रोल रहने वाला है,2018 के चुनावों में बीजेपी और कोनराड संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी ने अलग-अलग लड़ाई लड़ी थी। बीजेपी 47 सीटों पर लड़कर सिर्फ दो सीट हासिल कर पाई थी और फिसड्डी साबित हुई थी,लेकिन ये सरमा का जादू ही था, जिसके चलते केवल दो सीट लाकर भी वह सत्ता में भागीदार बन गई। लेकिन इस बार कोनराड संगमा की पार्टी एनपीपी के लिए चुनावी कई चुनावी मुद्दे अहम हैं,और कहा जा रहा है कि हिमंत बिस्वा सरमा दोनों दलों के बीच गठबंधन पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं।
असम और मेघालय के बीच 884.9 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है और दोनों राज्यों के बीच 12 स्थानों पर विवाद चले आ रहे हैं,इन दोनों राज्यों ने 12 में से 6 विवादित क्षेत्रों के समाधान के लिए पिछले साल मार्च में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।वहीं बाकी 6 विवादित क्षेत्रों को हल करने की दिशा में चर्चा चल रही है। सरमा और संगमा के बीच एक सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं,असम और मेघालय के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद भी दोनों के मधुर संबंधों की वजह से ही थोड़ा शांत है।