गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने केएलओ प्रमुख जीवन सिंह को आराम करने की सलाह देकर कामतापुर राज्य गठन के सपने को पूरी तरह से खत्म कर दिया। शनिवार को जनता भवन में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि कामतापुर राज्य के संदर्भ में सरकारी स्तर पर कोई चर्चा नहीं हुई है। कामतापुर राज्य के गठन पर मुख्यमंत्री की स्थिति ने पश्चिम असम में कोच-राजवंशी समुदाय के  लोगों और कुछ राजनीतिक दलों की खुशी को चकनाचूर कर दिया।

केएलओ प्रमुख जीवन सिंह के आगमन के समानांतर कोच राजवंशी जातीय समूह के कुल दल और नेताओं ने दृढ़ता से दावा करते हुए सार्वजनिक बयान भी दिए थे कि 26 जनवरी से पहले केंद्र सरकार कामतापुर राज्य गठन की घोषणा करेंगे। कुछ नेताओं ने भेदभावपूर्ण टिप्पणियां भी करनी शुरू कर दीं कि कोच-राजवंशी लोग असमिया बिल्कुल नही थे और उन्हें असम में रहने को मजबूर किया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में यह कह कर सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया कि इतने साल विदेश में रहने के बाद कोई आया है। उसे चाय पीने दीजिए।

असम को देखने दीजिए, समझने दीजिए। चर्चा करने वाले लोग हैं, वे चर्चा करते रहेंगे। कभी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। गौरतलब है कि केएलओ प्रमुख जीवन सिंह फिलहाल असम सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय की सीधी निगरानी में गुवाहाटी में हैं। सीएम ने कहा कि जीवन सिंह लंबे समय के बाद यहां आए हैं। वे यहाँ ठहरेंगे, बात करेंगे। वे भारत सरकार के समक्ष राजनीतिक मांगों को पेश करेंगे। भारत सरकार उनके साथ चर्चा करेगी। फिर एक दिन समझौता होगा। डॉ. शर्मा ने जीवन सिंह के साथ उनके संबंध के बारे में बताते हुए कहा कि वे मुझसे छोटे भाई की तरह बात करते हैं। मैं भी उनसे अपने बड़े भाई की तरह बनकर बात करता हूं। मुझे राजनीति के बारे में कोई बात नहीं करनी है। यह भारत सरकार की अख्तियार की बात है। सीएम ने स्पष्ट कर दिया कि कामतापुर राज्य के बारे में हमसे किसी ने चर्चा नहीं की।

चर्चा होने पर मैं इस बारे में बात करूंगा। कामतापुर के बारे में बतौर मुख्यमंत्री मुझसे किसी ने एक शब्द भी नहीं कहा। लेकिन असमिया मीडिया ने घोषणा की कि 26 जनवरी से पहले कामतापुर राज्य होगा। सीएम ने मीडिया से सवाल किया, क्या आप केएलओ की बात मानेंगे या राज्य सरकार की बातों पर ध्यान देंगे? अगर कुछ होना है तो चर्चा होनी चाहिए, त्रिपक्षीय बैठकें होनी चाहिए, बातचीत होनी चाहिए। लेकिन असम सरकार के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ है। हमने कामतापुर स्वायत्त परिषद दी है। मुझे नहीं पता कि कामतापुर राज्य का मुद्दा कहां से आया। मैं कई बार मुख्य सचिव से पूछा कि क्या कुछ आया है। पर वहां कुछ भी नहीं है लेकिन हमने इसे यहां कामतापुर में बनाया है।

गौरतलब है कि 26 जनवरी की सुबह कामतापुर के गठन के बारे में सुनने के लिए बहुत से लोग बेताब हैं। सीएम ने कहा कि असम एक बहुभाषी बहु-जातीय राज्य हैं, कभी कामतापुर को लेकर भी चर्चा हो सकती है। तब हम बोड़ोलैंड के नेताओं को, राभा समूहों के नेताओं को, उत्तर बंगाल के आंदोलनकारियों को बातचीत के लिए बुलाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि मैं पिछले 15 दिनों से बंगाल में एक अखबार देख रहा हूं। लेकिन उसमें कामतापुर के संदर्भ में कोई खबर नहीं है। जब कोई मुद्दा ही नहीं है तो असम सरकार कामतापुर के बारे में क्या कहेगी?