गुवाहाटी : अल्फा-सरकार द्वारा प्रस्तावित शांति वार्ता की संभावना शायद समाप्त हो गई है। अल्फा (स्वतंत्र) के सेनाध्यक्ष परेश बरुवा और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के अच्छे संबंधों में दरार पड़ गई है। विद्रोही समूह ने एक बार फिर गणतंत्र दिवस के बहिष्कार और 26 जनवरी को पूरे असम बंद का आह्वान किया है। गौरतलब है कि अल्फा (स्वतंत्र) ने पिछली परंपरा को तोड़ते हुए पिछले साल गणतंत्र दिवस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था।
हिमंत विश्व शर्मा ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से ही शांति वार्ता के प्रति सद्भावना दिखाई थी जिसके परिणाम स्वरूप अल्फा (स्वतंत्र) प्रमुख परेश बरुवा ने एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा की थी और साथ ही उन्होंने गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर बंद घोषणा करने की परंपरा को भी तोड़ दी थी। अल्फा (स्वतंत्र) ने पिछले साल गणतंत्र दिवस पर किसी तरह के बंद की घोषणा नहीं की।
हालाँकि, शांति वार्ता फलदायी नहीं रही और विद्रोही समूह अब अपनी पुरानी स्थिति में लौट आया है। इस बार उन्होंने फिर से 26 जनवरी में गणतंत्र दिवस समारोह के बहिष्कार करने का आह्वान किया और उस दिन पूर्ण असम बंद का ऐलान किया। अल्फा (स्वतंत्र) के साथ पूर्वोत्तर के विद्रोही समूह एनएससीएन और जीपीआरएन ने एक संयुक्त बयान में देश के 74वें गणतंत्र दिवस मनाने के खिलाफ आह्वान कियां। कैप्टन रुमेल असम द्वारा हस्ताक्षरित एक संयुक्त बयान में अल्फा (स्वतंत्र) के साथ उक्त दोनों संगठनों ने असम और नागालैंड बंद का आह्वान किया है।
अल्फा (स्वतंत्र) ने 25 जनवरी की रात 12 बजे से 26 जनवरी की शाम 6 बजे तक बंद का आह्वान किया। अल्फा के बयान में कहा गया है कि इस बंद के दौरान आपातकालीन विभाग, संचार माध्यम और धार्मिक गतिविधियों को जारी रखने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। अल्फा ने पहले की तरह ही सार्वजनिक स्थानों, सरकारी और गैर-सरकारी दफ्तरों में भी गणतंत्र दिवस को न मनाने का आह्वान किया।