नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम के जरिए एक बार फिर से देश को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने देशवासियों को न्यू इंडिया के बारे में बताया। इसके अलावा उन्होंने आदिवासी समाज की भूमिका से लेकर पद्म पुरस्कार पाने वाले हस्तियों के बारे में भी चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह में अनेक पहलुओं की काफी प्रशंसा हो रही है।

26 जनवरी की परेड के दौरान कर्तव्य पथ का निर्माण करने वाले श्रमिकों को देखकर बहुत अच्छा लगा। इस परेड में पहली बार हिस्सा लेने वाली महिला ऊंट सवार और सीआरपीएफ की महिला टुकड़ी भी काफी सराहना हो रही है।  मन की बात के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हम भारतीयों को इस बात का गर्व भी है कि हमारा देश लोकतंत्र की जननी भी है। लोकतंत्र हमारी रगों में हैं, हमारी संस्कृति में है। सदियों से यह हमारे कामकाज का भी एक अभिन्न हिस्सा रहा है। स्वभाव से हम एक लोकतांत्रिक समाज हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि पद्म पुरस्कार विजेताओं की एक बड़ी संख्या आदिवासी समुदायों और आदिवासी समाज से जुड़े लोगों से आती है। आदिवासी जीवन शहर के जीवन से अलग है, इसकी अपनी चुनौतियां भी हैं। इन सबके बावजूद आदिवासी समाज अपनी परंपराओं को बचाने के लिए हमेशा आतुर रहता है। जनजातीय समुदायों से जुड़ी चीजों के संरक्षण और उन पर शोध के प्रयास भी होते हैं। ऐसे ही टोटो, हो, कुइ, कुवी और मांडा जैसी जनजातीय भाषाओं पर काम करने वाले कई महानुभावों को पद्म पुरस्कार मिले हैं। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है।

पीएम मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष दोनों का निर्णय भारत के प्रस्ताव के बाद लिया है। योग भी स्वास्थय से जुड़ा है और बाजरा भी स्वास्थय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दोनों अभियानों में जनता की भागीदारी के कारण एक क्रांति रास्ते पर है। गोवा में पर्पल फेस्ट इवेंट हुआ। दिव्यांगजनों के कल्याण को लेकर यह अपने-आप  में एक अनूठा प्रयास था। यहां आए लोग इस बात को लेकर रोमांचित थे कि वो अब मीरामार बीच घूमने का भरपूर आनंद उठा  सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मैं एक दिलचस्प किताब का जिक्र करूंगा। इसका नाम इंडिया- द मदर ऑफ डेमोक्रेसी है। इसमें कई बेहतरीन कहानियां हैं। इसको सभी को पढ़ना चाहिए।

पीएम ने कहा कि मुझे खुशी है कि देश के हर कोने में, जहां भी जी-20 समिट हो रही है, वहां मिलेट्स से बने पौष्टिक, और स्वादिष्ट व्यंजन शामिल होते हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि देश का ये प्रयास और दुनिया में बढ़ने वाली मिलेट्स की डिमांड हमारे छोटे किसानों को कितनी ताकत देने वाली है। इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स की ऐसी शानदार शुरुआत के लिए और उसको लगातार आगे बढ़ाने के लिए देशवासियों को बधाई देता हूं। योग दिवस और हमारे विभिन्न तरह के मोटे अनाजों या मिलेट्स में काफी कुछ कॉमन है। इस बदलाव का बहुत बड़ा प्रभाव भी दिख रहा है। जिस तरह लोगों ने व्यापक स्तर पर सक्रिय भागीदारी करके योग और फिटनेस को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है, उसी तरह मिलेट्स को भी लोग बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं। लोग अब इसको अपने खानपान का हिस्सा बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में घरेलू स्तर पर दाखिल किए जाने वाले पेटेंट की संख्या, विदेशों से दाखिल किए जाने वाले पेटेंट से अधिक हो गई है और उन्हें विश्वास है कि ‘तकनीकी दशक’ (टेकेड) होने का भारत का सपना इन नवोन्मेषकों के दम पर पूरा होगा।

मोदी ने कहा कि यह देश की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री प्रौद्योगिकियों के विकास वाले इस दशक के लिए ‘तकनीकी दशक’ शब्द का पहले भी प्रयोग कर चुके हैं। इनमें से बहुत सारी प्रौद्योगिकियां भारत में ईजाद की गई हैं। मोदी ने कहा कि पेटेंट दाखिल करने के मामले में भारत का विश्व में सातवां स्थान है, जबकि ट्रेडमार्क पंजीकरण में वह पांचवें नंबर पर है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत के पेटेंट पंजीकरण में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि वैश्विक नवोन्मेष सूचकांक (ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स) में भारत 2015 में 80वें स्थान के मुकाबले अब 40वें पायदान पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि  मुझे विश्वास है कि तकनीकी दशक बनने का भारत का सपना उसके नवोन्मेषकों और उनके द्वारा दाखिल किए जाने वाले पेटेंट से पूरा होगा।

मोदी ने कहा कि प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान ने 2022 में 145 पेटेंट कराए हैं, जो एक शानदार मिसाल है। उन्होंने बताया कि देश में रामसर स्थलों (आर्द्रभूमि के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय मान्यता) की कुल संख्या बढ़कर 75 हो गई है, जो 2014 में 26 थी। मोदी ने स्थानीय समुदायों की सराहना करते हुए कहा कि वे जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रशंसा के पात्र हैं।  उन्होंने कहा कि भारत की ये आर्द्रभूमि भी हमारी प्राकृतिक क्षमता का उदाहरण हैं। ओडिशा की चिल्का झील 40 से अधिक जलपक्षी प्रजातियों को आश्रय देने के लिए जानी जाती है। ई-कचरे के विषय पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर इसका ठीक से निपटान नहीं किया जाता है, तो यह पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन अगर सावधानी से इसे निपटाया जाए, तो यह पुनः उपयोग की चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) में एक बड़ी ताकत बन सकता है।