गुवाहाटी : अपने बयानों से हमेश सुखिर्यो में रहने वाले धुबड़ी के सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि असम के मुसलमान असमिया भाषा को जिंदा रखे हुए हैं। असम का कोई भी मुसलमान कहीं भी जाने पर वह असमिया भाषा में बात करता हैं। एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल  का असमिया भाषा पर  ताजा टिप्पणी एक बार फिर चर्चा में है।

अजमल ने व्यंग्यात्मक ढंग से कहा कि मैं चुनौती दे सकता हूं कि हम मुसलमानों ने असम में असमिया भाषा को जिंदा रखा है। हमने असमिया भाषा की विरासत को भी बरकरार रखा है और इसकी रक्षा भी की है,लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग हमें बांग्लादेशी कहते हैं। यह कैसे संभव है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या बांग्लादेश में लोग असमिया भाषा सीख रहे हैं? असम की भाषा और संस्कृृति को हमने दिल से अपनाया और हमेशा उसकी रक्षा के लिए काम करते रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि अजमल के इस बयान के बाद काफी प्रक्रिया आने लगी है। कई संस्थाओं ने तो अजमल के इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की, वहीं राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को आने वाले चुनाव में भुनाने की रणनीति बना रहे हैं। उल्लेखनीय है कि अजमल ने असम में तंबाकू की बिक्री पर भी टिप्पणी की और कहा कि ये उत्पाद बेकार हैं और इन पर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।  तंबाकू उत्पाद और सेवन से लोग मरते हैं जो कैंसर का कारण बनता है,लेकिन सरकार चुप है, क्योंकि वे इससे अच्छा राजस्व संग्रह करती है।