डिजिटल डेस्क: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से बरी हुए छावला गैंगरेप के आरोपी को दिल्ली पुलिस ने एक मर्डर के आरोप में गिरफ्तार किया है,दोनों आरोपी पवन और विनोद पर एक ऑटो ड्राइवर की हत्या का आरोप है। द्वारका के DCP एम हर्षवर्धन ने कहा कि आरोपियों में से एक विनोद छावला गैंगरेप केस का भी आरोपी था।
2012 में हुए छावला गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को विनोद समेत 3 दोषियों को बरी कर दिया था,जबकि हाईकोर्ट और निचली अदालत ने इन्हें फांसी की सजा सुनाई थी। DCP के मुताबिक, लूट के लिए ऑटो ड्राइवर के गले में चाकू मारा था।तथा 25-26 जनवरी की दरमियानी रात पवन और उसके साथी विनोद ने द्वारका इलाके में एक ऑटो रिक्शा को बुक किया,और कुछ समय बाद हीऑटो वाले को लूटने की कोशिश की। जब ऑटो वाले ने इसका विरोध किया तो दोनों ने ऑटो वाले के गले में चाकू मारकर फरार हो गए। मौके पर पहुंचकर दिल्ली पुलिस ने ऑटो ड्राइवर को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
आखिर क्या हैं छावला गैंगरेप:
1.9 फरवरी 2012 को उत्तराखंड की लड़की का दिल्ली के छावला इलाके से अपहरण किया गया,तथा 14 फरवरी 2012 को रेप किया गया और बॉडी को जलाकर हरियाणा के रेवाड़ी में एक खेत में फेंक दिया।
2. दिल्ली के नजफगढ़ में शिकायत दर्ज कि गई,और शिकायत में कहा गया कि आरोपी लड़की को गाड़ी में बिठाकर दिल्ली से बाहर ले गए थे,और गैंगरेप के दौरान उसके शरीर को सिगरेट से दागा और चेहरे पर तेजाब डाला गया। तथा उसके शरीर पर कार में रखे औजारों से हमला किया गया। इसके बाद हत्या कर दी। इस केस में रवि कुमार, राहुल और विनोद को आरोपी बनाया गए थे।
3.साल 2014 में निचली अदालत ने रवि, राहुल और विनोद को दोषी पाया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई, और इसी साल अगस्त में हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा था।
4. हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोषियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी जहाँ दिल्ली पुलिस ने सजा कम किए जाने का विरोध किया था,और कहा था कि यह अपराध केवल पीड़िता के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह समाज के खिलाफ अपराध है। दिल्ली पुलिस का यह भी कहना था कि यह जघन्य अपराध है। हम दोषियों को किसी भी तरह की राहत दिए जाने के खिलाफ हैं। पीड़ित लड़की के पिता ने भी कहा था कि मामले के दोषियों को फांसी की सजा दी जाए।हमें उम्मीद थी कि न्याय मिलेगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हमें तोड़ दिया है।