गुवाहाटी : देश की राजधानी दिल्ली की तरह पूर्वोत्तर के मुख्यद्वार गुवाहाटी का वातावरण भी पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है। इसका जीता-जागता उदाहरण आज बुधवार को महानगर के विभिन्न अंचलो में देखा गया। आज दिनभर नगर के वायुमंडल में धूल के कण उड़ते दिखे। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि महानगर में जल,थल व नभ में भी धूल के कणों को सर्वत्र विचरते हुए देखा गया, वहीं कई जानकारों का मानना है कि गत कई दिनो से बारिश नहीं हुई। साथ ही नगर में घर निर्माण के कार्य भी तेजी से जारी हैं। हाल ही में महानगर में जगह- जगह ड्रेनों की सफाई की गई है और इसकी मिट्टी बाहर निकाली गई है, जो इस मौसम में धूल कण में तब्दील हो गए हैं।
इन सबके बीच आई तेज हवाओं के बहने के चलते भूमि के धूल कण हवाओं के साथ जल,थल व नभ में पूरी तरह से फैल गए, जिसके कारण नगरवासी दिन भर धूल- कण से नहाते रहे, वहीं बोरझार स्थित मौसम विभाग का कहना है कि अगामी 24 घंटे अर्थात देर रात तक हल्की बारिश होने के आसार हैं,इसके बाद वृहस्पतिवार को मौसम के मिजाज में कुछ सुधार की संभावना है, वहीं मौसम का अधिकतम तापमान 27 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 13 डिग्री होने के आसार हैं।
विभाग का कहना है कि आज गुवाहाटी का अधिकतम तापमान 24.4 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 13.1 डिग्री रहा। डॉक्टरों ने शहरवासियों को लंबे समय तक ऐसी स्थितियों के संपर्क में रहने पर सांस की समस्याओं की चेतावनी दी और लोगों को सलाह दी कि जब भी बाहर कदम रखें तो फेस मास्क का उपयोग करें। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के आंकड़ों के अनुसार शहर के विभिन्न छोरों पर सभी चार मापक स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता 245 या 250 या उससे अधिक थी। पानबाजार और रेलवे कॉलोनी में एक्यूआई, दोनों मुख्य शहर क्षेत्र के भीतर, 245 और 264 आंकी गई। यह हवाई अड्डे (271) और आईआईटी-गुवाहाटी परिसर (250) में भी खराब श्रेणी का था, जो मुख्य शहर की सीमा के बाहर स्थित हैं। उल्लेखनीय है कि 200 से ऊपर वायु गुणवत्ता को खराब के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और सीपीसीबी के अनुसार यह लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी का कारण बनता है।
असम के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबीए) के अधिकारियों ने कहा कि शहर में धूल भरी आंधी जैसी स्थिति का एक प्रमुख कारण बारिश की कमी है। गुवाहाटी में पिछली बार बारिश हुए तीन महीने से अधिक हो गए हैं। सर्दियों में बारिश होना सामान्य बात है,लेकिन इस साल शहर में ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, इस अवधि के दौरान राज्य के अन्य हिस्सों में बारिश हुई है। अधिकारी ने कहा कि कई निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता में और गिरावट आई है। पीसीबीए अधिकारी ने कहा कि गुवाहाटी के साथ-साथ बहने वाली ब्रह्मपुत्र से शहर में बहने वाली रेत भी धूल भरी आंधी जैसी स्थिति में योगदान दे रही है।
शहर की एक चिकित्सक डॉ मुन्मी बोरा ने चेतावनी दी कि हवा में इस तरह की धूल और अन्य कणों के संपर्क में आने से सांस की गंभीर समस्या हो सकती है। हम मरीजों को सलाह देते हैं कि जहां तक संभव हो बाहर जाते समय अपने चेहरे को ढक लें। अस्थमा जैसी मौजूदा श्वसन समस्याओं वाले लोगों को विशेष रूप से ऐसी स्थितियों के संपर्क में न आने की सलाह दी जाती है। डॉ. बोरा ने कहा कि ऐसे हालात में लोगों में सांस की बीमारियों के अलावा आंखों में संक्रमण और त्वचा की एलर्जी भी आम होती है। सड़क और भवन निर्माण कार्य ने वायु प्रदूषण में बहुत योगदान दिया है। इसके परिणामस्वरूप अस्थमा और सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) जैसी सांस की बीमारी के लिए अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है।
उल्लेखनीय है कि आज के मौसम के मिजाज में बदलाव के चलते नगर में आज उड़नेवाले धूल कणों के चलते हर दिन काफी दूरी से दिखने वाला गांधी मंडप का तिरंगा भी धूल कणों में ढका दिखा। ऊंचे-ऊंचे भवन के साथ नीलाचल पर्वत स्थित कामाख्या मंदिर, उमानंद मंदिर, दिर्घेश्वरी मंदिर, बीरूबाड़ी स्थित अर्धनारीश्वर मंदिर, नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर, भांगाघर का टीवी टावर के साथ ही फ्लाईओवर ब्रिज आदि भी कुछ दूरी से नही दिख रहे थे। हर दिन पान बाजार तथा मोराखाली ब्रिज के बीचों-बीच स्थित गुवाहाटी रेलवे स्टेशन और ट्रेक के साथ ही स्टेशन परिसर में लगा तिरंगा झंडा भी धुंधला दिख रहा था। कुल मिलाकर महानगर गुवाहाटी में ऐसी स्थिति कम ही दिखती है, परंतु आज बुधवार को जो भी दिखा, वह अगले दिनों की भयावहता को प्रदर्शित करता है।