संसार के प्रत्येक प्राणी का जीवन आधार जल ही है। शायद ही ऐसा कोई प्राणी हो जिसे जल की आवश्यकता न हो। मानव अपने स्वास्थ्य, सुविधा, दिखावा व विलासिता को दिखाने के लिए अमूल्य जल की बर्बादी करने से नहीं चूकता है। परिणामस्वरूप अधिकांश जगहों पर जल संकट की स्थिति पैदा हो चुकी है। यदि हम अपनी आदतों में थोड़ा-सा भी बदलाव कर लें तो पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है। बस आवश्यकता है दृढ़संकल्प करने की तथा उस पर गंभीरता से अमल करने की, क्योंकि जल है तो हमारा भविष्य है। इसलिए यदि हम पानी की बचत करते हैं तो यह भी जल संग्रह का ही एक रूप है। एक अध्ययन से पता चला है कि मानव यदि अपनी आदतों को बदल लें तो 80 प्रतिशत से भी अधिक पानी की बचत हो सकती है। यदि मानव तमाम नहीं कुछ ही आदत बदल लें तो भी 15 प्रतिशत जल की बचत संभव है।
आवश्यकताः यदि हमारे देश में वर्षाजल के रूप में प्राप्त पानी का पर्याप्त संग्रहण व संरक्षण किया जाए, तो यहां जल संकट को समाप्त किया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान के अनुसार भारत में वर्ष 2050 तक अधिकांश नदियों में जलाभाव की स्थिति उत्पन्न होने की पूरी संभावना है। यदि निम्नलिखित बातों पर ध्यान दिया जाए तो जल संरक्षण सुगम हो जाता है।
1. प्रत्येक गांव/बस्ती में एक तालाब होना आवश्यक है जिसमें जल संग्रह हो सके तथा आवश्यकतानुसार उपयोग में लाया जा सके।
2. नदियों पर छोटे-छोटे बांध व जलाशय बनाए जाएं ताकि बांध में पानी एकत्र हो सके तथा आवश्यकतानुसार उपयोग में लाया जा सके।
3. नदियों में प्रदूषित जल को डालने से पूर्व उसे साफ करना जरूरी है ताकि नदियों का जल साफ सुथरा बना रहे।
4.अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाए ताकि ये वृक्ष एक तरफ तो पर्यावरण को नमी पहुंचाए तथा दूसरी ओर वर्षा करने में सहायता करें।
5. जल प्रवाह की समुचित व्यवस्था होनी आवश्यक है।
6. जल को व्यर्थ में बर्बाद न करें और न ही प्रदूषित करें।
7. भूमिगत जल का उपयोग समय तथा उपलब्धता के आधार पर ही किया जाना चाहिए। ताकि आवश्यकता के समय इसका उपयोग किया जा सके।
8. भवनों, सार्वजनिक स्थलों, सरकारी भवनों में जल संरक्षण के लिए व्यवस्था की जाए।