दुनिया के अमीर देशों के नेताओं ने गरीब देशों को कोविड-19 रोधी टीके की एक अरब से ज्यादा खुराकें मुहैया कराने का संकल्प लिया है। इसके साथ ही उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर वैश्विक न्यूनतम कर का समर्थन किया और सहमति जतायी कि वे चीन की बाजार विरोधी आर्थिक नीतियों से मुकाबला के लिए साथ मिलकर काम करेंगे और बीजिंग से शिनजियांग और हांगकांग में मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए कहा। ब्रिटेन में चल रही जी-7 समिट का रविवार को आखिरी दिन था। शनिवार को वन अर्थ-वन हेल्थ का मंत्र देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भी लगातार दूसरे दिन समिट को वर्चुअली संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी। विदेश मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी पी हरीश ने मीडिया को बताया- प्रधानमंत्री मोदी ने जी-7 देशों के नेताओं से कोरोना वैक्सीन को पेटेंट फ्री करने की वकालत की साथ ही सभी देशों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए सहयोग मांगा। इसके साथ ही उन्होंने यात्रा छूट(ट्रिप्स वेबर)  के समर्थन का आग्रह किया। ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका ने इसका समर्थन किया। इसके पहले डब्ल्यूटीओ और यूएन सेक्रेटरी जनरल भी इसका समर्थन कर चुके हैं। इन सभी का मानना है कि ग्लोबल वैक्सीनेशन प्लान के लिए यह ट्रिप्स वेबर बहुत जरूरी है। भारत और साउथ अफ्रीका ने डब्ल्यूटीओ को इसका प्रस्ताव भी भेजा है। ट्रिप्स वेबर के तहत भारत की मांग है कि डब्ल्यूटीओ को महामारी से निपटने के लिए कारोबार से संबंधित कुछ खास अधिकारों (ट्रेड रिलेटेड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) पर अस्थायी तौर पर रोक लगा देनी चाहिए। अगर ऐसा होता है कि दुनिया के सभी देशों को वैक्सीन और मेडिकल सपोर्ट मिलने में आसानी होगी, क्योंकि कोई देश फिर किसी हेल्थ इमरजेंसी प्रोडक्ट पर अपना एकाधिकार नहीं जता सकेगा। प्रधानमंत्री ने दो सेशन में हिस्सा लिया। क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर उन्होंने कहा- इस चैलेंज का एकजुट होकर मुकाबला करना होगा। हम इसे टुकड़ों में बांटकर काम नहीं कर सकते। भारत जी-20 का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने पेरिस क्लाइमेट समिट से जुड़े अपने सभी वादे पूरे किए हैं। भारत जी-7 का प्राकृतिक सहयोगी है। हमें मिलकर विस्तारवाद और सायबर सिक्योरिटी पर भी काम करना होगा। हम लोकतंत्र और आजादी का समर्थन करते हैं। मोदी ने कहा कि इस मीटिंग में भारत को शामिल करने का मतलब ही यही है कि इस वक्त दुनिया जिस संकट से गुजर रही है, उससे भारत की भागीदारी के बिना नहीं निपटा जा सकता। हम हेल्थ गवर्नेंस, वैक्सीन की उपलब्धता और क्लाइमेट एक्शन पर जी-7 के साथ काम करना चाहते हैं। मोदी ने भारत में टेक्नोलॉजी के उपयोग का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह यहां आधार, डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम और जनधन आधार को मोबाइल से कनेक्ट किया गया।