डिजिटल डेस्क: ई-अदालतों ने सांसदों के काम काज पर सवाल उठाए हैं और क्षमता के अनुरूप कार्य नहीं करने पर अपनी चिंता व्यक्त की है, संसदीय पैनल ने कल कानून और न्याय मंत्रालय कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय के लिए स्थायी समिति के सामने चिंता व्यक्त की कि ई-न्यायालय अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रही हैं। कई सांसदों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर इस मामले पर अपनी चिंता व्यक्त की हैं और बीजेपी के राज्य सभा सांसद सुशील मोदी की अध्यक्षता वाले पैनल ने निराशा व्यक्त की कि सरकार ने ई-न्यायालय के कामकाज के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन वह ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई को कहना हैं कि “भारत सरकार ने बुनियादी ढांचे पर करीब 7000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, लेकिन ये अदालतें काम ही नहीं करती हैं,मंत्रालय से इसका कारण पूछा गया है।”
सांसदों ने मामलों के लंबित होने पर भी चिंता जताई है तथा पैनल ने कहा है कि मामलों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में लगभग 35 फीसदी खाली पद होना एक बड़ी चिंता है। पैनल का कहना हैं कि 13 मार्च को सत्र के दूसरे भाग की शुरुआत से पहले बजट 2023 की अनुदान मांगों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को बैठक की गई थी जहां कानून सचिव, न्याय विभाग के सचिव सहित कानून मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार उन लोगों में शामिल थे, जिन्हें समिति के सामने पेश किया गया था।