गुवाहाटी : देखते ही देखते फागुन की पछुवा हवा राज्य के आसमान में छा गई है और इसके साथ ही आम मौसमी संक्रमण भी बढ़ने लगा है। खासकर गुवाहाटी महानगर और इस के साथ-साथ राज्य के छोटे-बड़े हर शहरों में प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि के कारण माहौल खतरनाक होता जा रहा है। वातावरण में धूल, धुएं और तैरते कण कोहरे के साथ मिलकर सतह पर एक मोटी परत बना रही है। ऐसा वातावरण बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। प्रदूषण बच्चों में सांस की समस्या और संबंधित बीमारियों का कारण बन रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक दिन में प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित 63 बच्चों को भर्ती कराया गया है। उसी दिन जीएमसीएच के आपातकालीन विभाग में करीब 100 बच्चों का इलाज किया गया है।

यह सिर्फ एक दिन का उदाहरण है, लेकिन पिछले एक महीने से जीएमसीएच में रोजाना बड़ी संख्या में बीमार बच्चों का इलाज किया जा रहा है। जीएमसीएच के बाल रोग विभाग के डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों के तीन बीमारियों का इलाज चल रहा है। बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होने पर अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। बच्चे खासकर वायरल इंफेक्शन या ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं, कई बच्चे अस्थमा से पीड़ित हैं और कुछ बच्चों में निमोनिया का निदान किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार ये रोग वायुमण्डलीय प्रदूषण के कारण होते हैं। कई ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो प्रदूषण के कारण बच्चों में फेफड़ों की समस्या पैदा करते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल बच्चों को घर के अंदर रखना ही वास्तविक निवारक उपाय है।

बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर बाहर जाने पर गर्म पानी के इस्तेमाल करने, साफ-सफाई रखने और मास्क पहनने की सलाह देते हैं। राज्य के सबसे महत्वपूर्ण अस्पतालों में से एक गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में न केवल बच्चे, बल्कि सांस की समस्या के कारण बुजुर्ग मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। हाल के दिनों में गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और राज्य के अन्य अस्पतालों में रोगियों की संख्या में अपेक्षाकृत वृद्धि हुई है। मंगलवार को गुवाहाटी के कुछ हिस्सों में फागुन की पहली बारिश हुई और विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर आने वाले दिनों में और बारिश नहीं हुई तो स्थिति और खराब हो सकती है।

इसका मतलब है कि लंबे समय तक बारिश न होने के कारण वातावरण में तैरती धूल, धुएं और तैरते कणों का प्रदूषित आवरण बनता जा रहा है। ऐसे भी संकेत मिल रहे हैं कि अगर बारिश इसे जमीन पर न ला दिया तो स्थिति काफी जटिल हो सकती है। फिलहाल गुवाहाटी महानगर के निवासियों के लिए वायुमंडलीय तैरते प्रदूषण तथा जहरीले कण बारिश के पानी में मिलकर जमीन पर आ जाना ही प्रदूषण से निजात पाने का एकमात्र विकल्प है।