डिजिटल डेस्क: हरियाणा के गुरुग्राम से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, यहां एक 33 साल की महिला मुनमुन माझी ने खुद को अपने 10 साल के बेटे के साथ 3 साल तक घर में बंद रखा और उसे डर था कि अगर उसका बेटा बाहर निकला तो वो कोविड से खत्म हो जाएगा। कल पुलिस ने दोनों को बाहर निकाला, ये मामला तब सामने आया जब महिला के पति सुजान माझी ने परेशान होकर एक हफ्ते पहले पुलिस को इसकी सूचना दी।
माझी एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर है और उसने पुलिस को बताया कि 3 साल से उसकी पत्नी ने खुद को और बेटे को घर में बंद कर रखा है, उसने बताया कि जब लॉकडाउन समाप्त हुआ तो वो काम के लिए बाहर निकला, लेकिन इसके बाद उसे भी घर में घुसने नहीं दिया। हालांकि माझी उन दोनों को हर सामान उपलब्ध कराता था और सामान को मेन गेट पर छोड़ देता था, जहां से वो दोनों सामान ले लिया करते थे और शुरुआत में वो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के यहां रुका और उसे उम्मीद थी कि वो जल्दी ही उसे घर में एंट्री दे देगी, लेकिन जब उसकी पत्नी नहीं मानी तो उसे किराए पर घर लेना पड़ा।
शुरुआत में पुलिस को इस कहानी पर यकीन नहीं हुआ, जब पुलिस ऑफिसर ने मुनमुन को कॉल किया तो उसने कहा कि वो और उसका बच्चा एकदम ठीक हैं, इसके बाद जब वीडियो कॉल किया गया तो सच्चाई सामने आ गई। ऑफिसर ने कहा कि जब मैंने बच्चे को देखा तो मैं भावुक हो गया, उसके बाल उसके कंधे तक बढ़ चुके थे और जब महामारी शुरू हुई तब बच्चा 7 साल का था और अब 10 साल का हो गया है। जब पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर की टीम ने फ्लैट में प्रवेश किया तो वे हैरान रह गए, 3 साल से कचरा बाहर नहीं फेंका गया था और अपार्टमेंट में बहुत ज्यादा गंदगी थी। फर्श पर कपड़ों का ढेर था, बाल फैले हुए थे, खाने के आइटम्स के खाली पैकेट पड़े थे और हर सामान पर गंदगी की मोटी परत जमी हुई थी, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार ने कहा कि अंदर इतना कचरा था कि अगर कुछ दिन और बीत जाते तो कुछ भी अनहोनी हो सकती थी।