डिजिटल डेस्क: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंसुख मंडाविया ने कहा कि भारत ने कोरोना वायरस संक्रमण और इससे होने वाली संभावित मौतों को कम करने में अच्छा काम किया है,आगे उन्होंने एक रिपोर्ट में कहा कि भारत ने कोरोना संक्रमण से 34 लाख लोगों की जान बचाने में बड़ी कामयाबी हासिल की हैं। यह सब राष्ट्रव्यापी कोरोना वैक्सीनेशन अभियान की वजह से संभव हो सका हैं,आगे केंद्रीय मंत्री ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉम्पटेटिवनेस द्वारा ‘हीलिंग द इकोनॉमी: एस्टिमेटिंग इकोनॉमिक इम्पेक्ट ऑफ वैक्सीनेशन एंड रिलेटेड मेजर्स’ नाम की एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें यह बातें कही गई है। जनवरी 2021 से भारत में वैक्सीनेशन अभियान शुरू हुआ और दिसंबर 2022 तक दो अरब वैक्सीनेशन डोज लगाए गए हैं, इनमें पहला, दूसरा और बूस्टर डोज भी शामिल है। स्वास्थ्य मंत्री ने ‘द इंडिया डायलॉग’ कार्यक्रम में कहा कि सरकार ने कोरोना संबंधी जरूरतों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और कोरोना संबंधी स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर, जैसे बेड्स, दवाइयां, लॉजिस्टिक्स और एन-95 मास्क और अन्य साजो सामान में कोई कमी नहीं की, तथा कोरोना से निपटने में सरकार ने कई पहल भी शुरू की, जैसे ई-संजीवनी टेलिमेडिसिन सर्लिस, आरोग्य सेतु, कोविड19 इंडिया पोर्टल शामिल।
जनता से 21.5 अरब डॉलर सेविंग :
भारत ने अपनी एक बड़ी आबादी को मुफ्त में वैक्सीन दिया है और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी वर्किंग पेपर में कहा गया है कि इसके जरिए सरकार ने लोगों का 21.5 बिलियन डॉलर बचाया। वर्किंग पेपर में यह भी कहा गया है कि कोविड वैक्सीन जैसे कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन ने भारत को कोरोना से लड़ने में बड़ी मददगार साबित हुई तथा इतना ही नहीं विदेशी यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में इंटरनेशनल मोनेट्री फंडी के हवाले से बताया गया है कि भारत सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने में 280 अरब डॉलर खर्च किए।
करोड़ो लोगों को दिया मुफ्त अनाज:
विदेशी यूनिवर्सिटी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए पहलों भारत के लोगों की बड़ी मदद की,सिर्फ इतना ही नहीं सरकारी रिलीफ पैकेज की वजह से देश की आर्थिक गतिविधियां भी जारी रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने एमएसएमई की मदद के लिए जो फंड जारी किए, उसने 10.28 मिलियन लोगों को राहत दी, और इससे 100.26 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ा, जो कि जीडीपी का 4.9% है। इतना ही नहीं सरकार ने कोरोना काल में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया और इसका आर्थिक प्रभाव 26.24 अरब डॉलर का रहा,तथा पीएम गरीब कल्याण योजना और अन्य केंद्रीय योजनाओं ने भारत को कोरोना से निपटने में बड़ी मदद की।