गुवाहाटी : कौन है भाजपा की बी टीम? कांग्रेस या एआईयूडीएफ? असम में एआईयूडीएफ गठबंधन को कांग्रेस आलाकमान पहले ही खारिज कर चुका है। एपीसीसी अध्यक्ष भूपेन बोरा से लेकर बरपेटा के सांसद अब्दुल खालेक तक ज्यादातर कांग्रेस के बड़े नेता प्रारंभ से ही एआईयूडीएफ गठबंधन को साफ तौर पर खारिज करते आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद दिसपुर स्थित विधायक आवास पर वृहस्पतिवार को कांग्रेस और एआईयूडीएफ विधायकों के बीच बंद कमरे में बैठक आयोजित हुई। इस बैठक को लेकर काफी रहस्य बना हुआ है। इस बात का व्यापक प्रचार है कि राज्य में कथित मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ दोनों पार्टियों के विधायक मिले, लेकिन आलाकमान की बाधा के बावजूद कांग्रेस विधायक एआईयूडीएफ विधायकों की बैठक में कैसे शामिल हुए? इस बैठक का मीडिया में भी खूब प्रचार हुआ।
बैठक का समय और स्थान मीडिया में पहले ही घोषित कर दिया गया था। उन्होंने बैठक के बारे में मीडिया से भी बात की। हालांकि कहा गया है कि यह बैठक राज्य में मुसलमानों पर जारी अत्याचार पर चर्चा के लिए हुई थी, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसके पीछे भाजपा का कोई राजनीतिक मंशा है। भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में असम की 14 लोकसभा सीटों में से 12 पर निशाना साध रही है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा ने दो राजनीतिक रणनीतियां अपनाईं प्लान-ए और प्लान-बी। वे योजना-ए के अनुसार कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच गठबंधन चाहती है। यदि दोनों दल गठबंधन करते हैं तो आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए यह एक सुनहरा अवसर होगा, लेकिन प्लान-ए की नाकामी के बाद भाजपा अब प्लान-बी को फलीभूत करने में जुटी हुई है।
इसके हिस्से के रूप में एआईयूडीएफ के दो विधायक अमीनुल इस्लाम और करीमुद्दीन बरभुइयां पश्चिम ग्वालपाड़ा निर्वाचन क्षेत्र के कांग्रेस विधायक अब्दुर रशीद मंडल के निवास पर गुरुवार को एक रहस्यमय बैठक की। गौरतलब है कि करीमुद्दीन बरभुइयां लंबे समय से कांग्रेस के बड़े आलोचक रहे हैं। वे अकसर गठबंधन को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते रहे हैं। बैठक के बाद एआईयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक रूप से कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें भविष्य पर चर्चा करना है, जबकि कांग्रेस विधायक अब्दुर रशीद मंडल का कहना है कि बाल विवाह के क्षेत्र में सरकार जो कर रही है, उस पर कांग्रेस और एआईयूडीएफ का भी विचार बराबर है। करीमुद्दीन बरभुइयां ने कहा कि हमें उन लोगों के बारे में सोचना होगा,जिनका हम प्रतिनिधित्व करते हैं।
यदि हम भाग-भाग होकर लड़ते रहे तो लड़ाई मजबूत नहीं होगी। हमें एकता स्थापित करना है। हम आज मुख्य रूप से धुबड़ी लोकसभा क्षेत्र के विकास पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि,गुरुवार को हुई बैठक ने कांग्रेस आलाकमान की अस्वीकृति और एपीसीसी अध्यक्ष भूपेन बोरा की कड़ी आपत्तियों के बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस बैठक ने रहस्य पैदा कर दिया है। ऐसी राजनीतिक बैठकें आमतौर पर गुप्त रूप से आयोजित की जाती हैं, खासकर ऐसी बाधाओं के बावजूद विधायक अब्दुर रशीद मंडल के आवास पर हुई बैठक को शुरू से ही मीडिया में खूब प्रचारित किया गया।
इससे कांग्रेस या एआईयूडीएफ को कितना फायदा होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन साफ है कि राजनीतिक तौर पर बीजेपी को फायदा होगा ऐसा लगता है कि गुरुवार को दिसपुर में विधायक के आवास पर बहुचर्चित राजनीतिक बैठक में भाजपा के प्लान-बी का पालन किया गया है।