शिलांग /कोहिमा : मेघालय और नगालैंड में विधानसभा चुनाव के लिए सुबह 7 बजे से चल रहा मतदान शाम 5 बजे खत्म हो गया। कुछ बूथों पर फायरिंग और पथराव की घटनाएं हुई, बाकी इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान हुआ। शाम 5 बजे तक मेघालय में 75 प्रतिशत से अधिक और नगालैंड में 83.36 प्रतिशत वोट डाले जा चुके हैं। दोनों राज्यों की विधानसभा में 60-60 सीटें हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 59-59 सीटों पर मतदान हुआ। इन दोनों राज्यों में के साथ त्रिपुरा में चुनाव के नतीजे 2 मार्च को आएंगे। त्रिपुरा में 16 फरवरी को वोट डाले गए थे। नगालैंड में 60 सीटें हैं, लेकिन एक सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के नाम वापस लेने के बाद 59 सीटों पर ही वोटिंग होगी। यहां भाजपा प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित कर दिया गया है।

वहीं, मेघालय में यूडीपी उम्मीदवार एच. डी. आर. लिंगदोह के निधन के बाद सोहियोंग सीट पर चुनाव टाल दिया गया है। नगालैंड के  मोकोकचुंग जिले के उमाबस्ती इलाके में अलोगताकि पोलिंग बूथ पर वोटिंग के दौरान पथराव हुआ। नगालैंड के भंडारी पोलिंग स्टेशन पर फायरिंग हुई, जिसमें एनपीपी वर्कर घायल हो गया। नगालैंड में सभी पोलिंग स्टेशन पर अलग-अलग सिक्योरिटी फोर्सेज की 305 कंपनियां तैनात की गईं। भाजपा उम्मीदवार सेरिंग ल्हामू ने अरुणाचल प्रदेश की लुमला विधानसभा सीट का उपचुनाव निर्विरोध जीत लिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उंगमा गांव में 2 पोलिंग स्टेशन पर वोटिंग मशीन के पास बैठा व्यक्ति ही सभी वोट डाल दिए। 3 राज्यों की 3 विधानसभा सीटों पर भी वोटिंग हुई। इनमें पश्चिम बंगाल की सागरदिघी, झारखंड के रामगढ़ और तमिलनाडु के ईरोड सीट शामिल हैं।

इस समय दोनों ही राज्यों में भाजपा की गठबंधन की सरकार है। मेघालय में नेशनल पीपल्स पार्टी ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई है, लेकिन इस बार दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, नगालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी और भाजपा गठबंधन की सरकार है। इस बार भी दोनों पार्टियां साथ चुनाव लड़ रही हैं। नगालैंड के 16 जिलों की 60 विधानसभा सीटों में से 59 पर सोमवार को मतदान हो रहे हैं। 10 फरवरी को अकुलुतो विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के कैंडिडेट खेकाशे सुमी ने नामांकन वापस ले लिया था, जिसके बाद भाजपा कैंडिडेट कजेतो किनिमी को निर्विरोध निर्वाचित कर दिया गया। चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर वी. शशांक शेखर ने कहा कि राज्य में कुल 13 लाख मतदाता हैं। 59 सीटों के 2,315 मतदान केंद्रों पर वोटिंग हो रही है। 183 कैंडिडेट चुनावी मैदान में हैं, जिसमें 4 महिला और 19 निर्दलीय कैंडिडेट शामिल हैं। मेघालय के 12 जिलों की 60 विधानसभा सीटों में मतदान हो रहे हैं। इसके लिए 3,419 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

यहां एनपीपी57 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस और बीजेपी ने 60-60 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इसके अलावा टीएमसी के 56 कैंडिडेट भी चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य में कुल 30 लाख मतदाता हैं। मैदान में 375 कैंडिडेट हैं, जिसमे 339 पुरुष, 36 महिलाएं शामिल हैं। मेघालय में 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस को सबसे ज्यादा 21 सीटें मिली थीं। कोनराड संगमा की पार्टी एनपीपीको 19 सीटें मिली थीं। अन्य पार्टियों में युडीपी को 6, पीडीएफ को 4, बीजेपीऔर एसपीडीपीको दो-दो सीट पर मिली थीं। कोनराड संगमा नहीं चाहते थे कि कांग्रेस सत्ता में आए, इसीलिए उन्होंने भाजपा सहित बाकी दलों के सहयोग से गठबंधन की सरकार बनाई बनाई और वह राज्य के मुख्यमंत्री बने। 5 साल बाद अब मेघालय का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल चुका है। राज्य में इस बार ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसीभी चुनावी मैदान में है। इस पर राहुल गांधी का कहना है कि मेघालय में भाजपा को सत्ता में लाने के लिए ममता बनर्जी मदद कर रही हैं।