डिजिटल डेस्क: दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की शराब घोटाला मामले में गिरफ्तारी और सीबीआई जांच के तरीके को चुनौती देने कि याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है,तथा सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है। आज इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा आपके पास सीधा यहां आने के बजाए अन्य उपाय भी हैं, आप हाईकोर्ट भी जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कि आप यह सारी बातें दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष क्यों नहीं रखते? जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, कोई घटना दिल्ली में हो रही है, इसका मतलब ये नहीं कि आप सीधे सुप्रीम कोर्ट चले आएंगे। सीजेआई ने कहा कि इस तरह से रोजाना यहां सौ मामले आने लगेंगे,सिंघवी ने कहा कि अधिकारों का मसला है. सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्ट समान रूप से ऐसे मामले में सुनवाई को सक्षम है।
सिंघवी ने दिया विनोद दुआ और अर्नब गोस्वामी मामले का हवाला:
CJI DY Chandrachud और Justice PS Narasimha की बेंच ने मामले की सुनवाई की और इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने सिंघवी से पूछा कि आपने एफआईआर और जांच को अनुच्छेद 32 में चुनौती दी है और इस पर सिंघवी ने विनोद दुआ और अर्नब गोस्वामी मामले का हवाला दिया।
तब CJI ने कहा वो दोनों पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामले थे, यहां स्थितियां अलग हैं और सिंघवी ने कहा कि सिर्फ दो बार उप मुख्यमंत्री को बुलाया तथा गिरफ्तारी पूरी तरह से गैरकानूनी है और जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी की जरूरत पर जोर दिया जबकि समन रिसीव किए गए और मेरे मुवक्किल कहीं भागने वाले नहीं थे,यह फैसला मेरे मुवक्किल ने अकेले नहीं लिया था।
CJI ने की याचिका खारिज करने की बात:
CJI ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत इस मामले में याचिका नहीं बनती है और CJI ने आगे कहा कि हम याचिका खारिज कर रहे हैं। इस पर सिंघवी ने कहा कि मुझे थोड़ी देर सुन लीजिए कि कैसे यह मामला अनुच्छेद 32 के तहत आता है, इसके बाद सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के पांच फैसलों का हवाला भी दिया हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए उन्हें हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है।