गुवाहाटी : असम सरकार द्वारा पावरलूम से बने गमछा और टेक्सटाइल पर प्रतिबंध लगाने के बाद गुजरात के कपड़ा कारोबारियों की हालत बेहद खराब हो गई है। राज्य सरकार के हस्तशिल्प विभाग ने असम के स्वदेशी कारीगरों और व्यापारियों की सुरक्षा के हित में मशीन से बने गमछा की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है और पावरलूम के गमछा के खिलाफ जगह-जगह अभियान शुरू किया है। इस संदर्भ में असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा के निर्देश को लेकर अब सूरत, गुजरात के कपड़ा कारीगर और व्यापारी चिंतित हो रहे हैं।
गुजरात कपड़ा व्यापारियों का संयुक्त मंच फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन और सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन केंद्रीय वस्त्र मंत्री दर्शना जरदोशा के समक्ष असम सरकार के निर्देश पर आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि असम और पूर्वोत्तर में 60 प्रतिशत कपड़ा सूरत, गुजरात में उद्योगों द्वारा आपूर्ति की जाती है। सूरत का कपड़ा व्यापार काफी हद तक असम पर निर्भर है। गुजरात असम में गमछा से लेकर मेखला-चादर तक सभी तरह के कपड़ों की मांग को पूरा कर रहा है। सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार सूरत के वस्त्र उद्योग असम में प्रति माह औसतन 100 करोड़ रुपए का कारोबार करते हैं।
व्यापार संघ ने यह भी दावा किया कि उसने असम सरकार द्वारा पावरलूम के वस्त्रों पर प्रतिबंध लगाने से पहले असम में फैंसी बाजार के व्यापारियों को 200 करोड़ रुपए के कपड़े की आपूर्ति की थी। सूरत कपड़ा व्यापारी संघ के महासचिव चंपालाल बोथरा ने कहा कि पावरलूम के वस्त्रों पर प्रतिबंध लगाने से सूरत के कपड़ा कारोबार को 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि कारोबारियों ने असम में रंगाली बिहू के मद्देनजर करीब 2,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि असम सरकार के निर्देश के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इस बीच, सूरत वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने कहा कि गुजरात भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा द्वारा पावरलूम के वस्त्रों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश पर हस्तक्षेप करने का वादा किया है।
इसके बाद असम सरकार ने रहस्यमय तरीके से हस्तशिल्प विभाग के गमछा विरोधी अभियान को रोक दिया है। हैरानी की बात यह है कि सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन द्वारा सार्वजनिक रूप से घोषणा करने के बावजूद कि गुवाहाटी के फैंसी बाजार में पावरलूम से बने 200 करोड़ रुपए के कपड़े स्टॉक में हैं, हस्तशिल्प और कपड़ा विभाग गुवाहाटी में अब तक केवल 86 गमछा और 145 मेखेला-चादर जब्त करने में कामयाब हुआ है। हथकरघा एवं कपड़ा विभाग के ऐसी नीति के कारण सीएम के पावरलूम के गमछा पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश पर सवाल उठ रहा है।