पर्यावरण को नहीं बचाएंगे तो जिस तरह से अभी पानी की बोतल बेची जा रही है, उसी तरह आने वाले समय में ऑक्सीजन के सिलेंडर हर दुकान पर बेचे जाएंगे, क्योंकि पर्यावरण में बसे खनिज संपदा और मिट्टी से हमारी संस्कृति, परंपरा व खानपान जुड़ा है। यह बातें कही हैं पर्यावरण को बचाने का संदेश देने के लिए पदयात्रा पर निकले आशुतोष पांडे ने । 24 वर्षीय आशुतोष उत्तर प्रदेश के अयोध्या से 10 हजार किमी की पदयात्रा पर निकले हैं। इस दौरान वे हजारीबाग पहुंचे तो उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए। आशुतोष की पद यात्रा उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य में पूरी हो चुकी है।
उन्होंने यात्रा के 97वां दिन झारखंड के हजारीबाग में प्रवेश किया है। आशुतोष पांडे कहते हैं कि अभी तक के 2100 किलोमीटर की यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कई स्कूलों में सेमिनार किया है। सेमिनार के दौरान हर स्कूल में पौधे लगाता हूं, जो मेरे निजी खर्च पर संपन्न होता है। उन्होंने बताया कि हजारीबाग के उपायुक्त से मिलने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री से मिलूंगा और उनसे पर्यावरण बचाने की मुहिम में समर्थन की अपील करूंगा ।
मैं ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के बाद ही पर्यावरण बचाने की मुहिम चला रहा हंू। जब मैंने पर्यावरण मुहिम चलाने के लिए आय अर्जित कर लिया तो 10 हजार किलोमीटर की यात्रा पर निकल पड़ा। आशुतोष बताते हैं कि वह उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत थे। पर्यावरण को बचाने की मुहिम में 90 हजार रुपए की सैलरी छोड़कर निकल पड़े । जब पर्यावरण नहीं रहेगा तब 90 हजार रुपए सैलरी की कोई कीमत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद पर्यावरण बचाने की मुहिम चला रहा था। यात्रा करने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे जिसके कारण मैंने नौकरी की और नौकरी त्याग कर अब 10 हजार किलोमीटर की यात्रा पर निकला हूं।