गुवाहाटीः मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने बुधवार को कहा कि असम जीडीपी अनुपात 23 प्रतिशत पर बना हुआ है और एक ठोस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। असम सरकार जिस प्रकार से काम कर रही है उससे जीडीपी ग्रोथ के मामले में तीन साल में पंजाब को पीछे छोड़ देगी। मुख्यमंत्री हिमंत ने आज राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि कोई भी सरकार ऋण लेकर अपने राज्य में बहुमुखी विकास कर सकती है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ने कर्ज लिया है, तो सवाल यह उठता है कि कोई भी बैंक कर्ज किसे देता है, जो सरकार लौटा सकती है। मुख्यमंत्री हिमंत ने दावा करते हुए कहा कि आरबीआई ने हमें 22 हजार करोड़ रुपए कर्ज लेने के लिए कहा था, लेकिन हमने 19 हजार करोड़ ही लिया।

असम सरकार 23 जीडीपी ग्रोथ दर के हिसाब से आगे बढ़ रही है। अगर असम में भाजपानीत गठबंधन सरकार इसी तरह से काम करती रही तो आगले तीन साल में पंजाब की जीडीपी को पार कर जाएगी। मुख्यमंत्री शर्मा ने पहली राज्य में बेरोजागर के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि असम में लगभग 12,36 299 युवा बेरोजगार हैं, जबकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान यह संख्या काफी ऊपर थी। बेरोजगारों की संख्या कम करने के साथ ही सरकार अपने वादे के मुताबिक मई महीने तक एक लाख लोगों को नौकरी देने का वादा पूरा कर लेगी। उन्होंने प्रति व्यक्ति आय पर बोलते हुए कहा कि पिछले वर्ष भारत की प्रति व्यक्ति आय 14 प्रतिशत थी, जबकि असम के लिए यह 17 प्रतिशत की वृद्धि कर रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल तक असम सरकार अपने कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने के लिए केंद्र के कोष पर निर्भर थी, लेकिन अब राज्य सरकार हर महीने की पहली तारीख को सभी 12 महीनों के वेतन का भुगतान करने के लिए आत्मनिर्भर है। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि असम से बाल विवाह खत्म करना ही होगा। यह कानून कांग्रेस के शासनकाल में ही बनाए गए थे। इस कुसंस्कार में शामिल होने वाले के प्रति सरकार सख्त है। बाल विवाह करने वालों पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी ढाई साल की सजा है, लेकिन 10 से 11 साल की बच्ची का जीवन बर्बाद करने वालों को हम 10 साल की सजा देने पर चर्चा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सदन से अपराधियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि पुलिस को किसी निर्दोष पर गोली चलाने की अनुमति नहीं है, लेकिन अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करने की पूरी छूट है। लोगों को बलात्कार,नशीले पदार्थ की तस्करी, समाज की बहू-बेटियों के साथ गलत कार्य समेत अन्य अपराधों को छोड़ना होगा।

उन्होंने कहा कि असम में महिला संबंधित अपराध काफी तेजी के साथ घटा है और हमें पूरा भरोसा है कि निकट भविष्य में और घटेगा। 2020 में 29 हजार अपराध महिलाओं के विरुद्ध दर्ज हुए थे,जबकि 2022 में मात्र 12 हजार दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि अब असम से आंदोलन,धरना, प्रदर्शन के दिन नहीं हैं।  इस प्रकार में बंदूक खरीदने के बजाज बंदूक जमा करने का समय है। एक समय था जब असम में नौकरी के नाम मोटी रकम ली जाती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है। प्रतिभावान चाहे किसी भी समुदाय के लोग हो उन्हें नौकरी आसानी से मिल रही है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि लाचित बरफुकन के बारे में विपक्ष के लोग सवाल उठा रहे हैं। हमारे लिए गौरव की बात है कि आजादी के 75 वर्ष बाद पूरी दुनिया के लोग लाचित के बारे में जाने हैं। वहीं बिहू एक बार फिर से दुनिया के सामने रखा जाएगा। असम की परंपरा को दुनिया के सामने ले जाने का हमने संकल्प लिया है और हम करेंगे। इसके लिए पैसा कोई बड़ी बात नहीं है।

उल्लेखनीय है कि इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी उपलब्धियों का लेखा-जोखा भी सदन में रखे। साथ ही तत्कालीन कांग्रेस सरकार में लिए गए कई फैसले को भी गिनाया। मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों के लिए घड़ियाली आंसू बहा रही है, सत्ता में होने पर उनके लिए कुछ भी नहीं की। मुसलमान राज्य में इस समय अब तक के सबसे शांतिपूर्ण माहौल में रह रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार ग्वालपाड़ा और उरांग वन क्षेत्रों से निष्कासन अभियान एवं कार्रवाई जारी रखेगी। उन्होंने अतिक्रमण को जनसंख्या में बढ़ोतरी से जोड़ते हुए कहा कि निष्कासन वास्तविक समस्या नहीं है। जनसंख्या बढ़ोतरी वास्तविक समस्या है और यदि हम इसे काबू नहीं कर सकते तो भूमि पर दबाव बढ़ना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि गुवाहाटी में सिलसाको बिल को भी खाली कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डा.शर्मा ने कहा कि बजट में सभी क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। शिक्षा क्षेत्र पर विशेष निवेश होने की संभावना है।