ब्रिस्बेनः ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन शहर में बुधवार को खालिस्तान समर्थकों ने इंडियन कॉन्स्यूलेट के मेन गेट को जबरदस्ती ब्लॉक कर दिया। यह कॉन्स्यूलेट ब्रिस्बेन के सबअर्बन एरिया तारिंगा में है। ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक- खालिस्तान समर्थक झंडे, पोस्टर और बैनर लेकर यहां पहुंचे। उन्होंने कॉन्स्यूलेट आने वाले सभी लोगों को अंदर ही नहीं आने दिया। इसकी वजह से कॉन्स्यूलेट में काम नहीं हो पाया। पिछले ही हफ्ते ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी एल्बनीज भारत दौरे पर आए थे।
मीडिया बीफ्रिंग के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भरोसा दिलाया था कि मंदिरों या भारतीयों पर हमले के मामलों में खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।ऑस्ट्रेलियाई अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक- खालिस्तान समर्थकों ने कॉन्स्यूलेट के एंट्री गेट को ही ब्लॉक कर दिया। इसकी वजह से वो लोग भी कॉन्स्यूलेट के अंदर नहीं जा पाए, जिन्हें यहां जरूरी काम थे। परविंदर सिंह म्ींसलैंड के रहने वाले हैं। उन्होंने ऑफिस से छुट्टी ली, क्योंकि उन्हें कॉन्स्यूलेट में काम है। उन्हें बेटे का ओवरसीज इंडियन कार्ड लेना था, लेकिन वो कॉन्स्यूलेट में जा ही नहीं सके। सिंह ने कहा- क्या अब ये खालिस्तानी हमें बताएंगे कि ऑस्ट्रेलिया में हमें कैसे रहना है? म्ींसलैंड पुलिस और सरकार को इन लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कुछ दिन पहले ही तो हमें यह भरोसा दिलाया था। ब्रिस्बेन में सराह गेट्स हिंदू ह्यूमन राइट्स की डायरेक्टर हैं। उन्होंने कहा- इंडियन कॉन्स्यूलेट को जबरदस्ती बंद कराया गया। यहां सिख फॉर जस्टिस के खालिस्तान समर्थक प्रोपेगंडा चला रहे हैं। सराह ने कहा- ब्रिस्बेन के सिख टेम्पल की बस में प्रोटेस्टर्स को यहां लाया गया। ये बहुत फिक्र की बात है। इस इलाके में रहने वाले लोगों को अपनी सुरक्षा की चिंता है। गेट्स के मुताबिक, जब खालिस्तानी समर्थक हंगामा कर रहे थे, तब वो खुद घटनास्थल पर मौजूद थीं। उन्होंने कहा- मंगलवार रात ही पुलिस और स्थानीय नेताओं ने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की थी। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि लॉ एंड ऑर्डर की दिक्कत बिल्कुल नहीं होने दी जाएगी। हर नागरिक की हिफाजत सबसे अहम जरूरत है।
डेमोक्रेटिक प्रोटेस्ट अपनी जगह ठीक हैं, लेकिन इनसे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। 22 फरवरी को कॉन्स्यूलेट की हेड अर्चना सिंह जब ऑफिस पहुंची थीं, तब उन्हें कैंम्पस में खालिस्तान के कुछ फ्लैग मिले थे। उन्होंने पुलिस के पास शिकायत दर्ज भी कराई थी।