गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने सोमवार को कहा कि उनकी सरकार 2026 तक बाल विवाह को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है और इसके लिए हर दो-तीन महीने में विशेष मुहिम चलाई जाएगी। असम से इस कुप्रथा को हर हाल में समाप्त करना होगा। मुख्यमंत्री शर्मा ने कांग्रेस नेता एवं विधायक कमलक्ष्या दे पुरकायस्थ के सवाल के जवाब में कहा कि विपक्ष कहता है कि वे बाल विवाह के खिलाफ हैं, लेकिन (बाल विवाह के खिलाफ मुहिम के लिए) समर्थन को लेकर हमेशा किंतु-परंतु किया जाता है।
राज्य सरकार इस मामले पर पीछे नहीं हटेगी और दोषी पाए जाने वालों कड़ी सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चियों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों को सरकार की ओर से कोई रियायत नहीं मिलेगी। उन्होंने अपरोध रूप से विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि असम में एक सामंती मानसिकता राज्य में बाल विवाह के उन्मूलन के लिए काम कर रही है जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने की कोशिश कर रही है, लेकिन ऐसे लोगों की दलीलों से सरकार पर किसी प्रकार का असर होने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि बाल विवाह से लड़ने के लिए 2023-24 के बजट में 200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं और इसका एक हिस्सा वकीलों को भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा ताकि सजा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा एक समर्पित हेल्पलाइन, जागरुकता मुहिम और पीड़ितों के पुनर्वास समेत कई अन्य कदम उठाए जाएंगे। साथ ही पंचायत स्तर पर भी बाल विवाह के प्रति जागरूक्ता अभियान के लिए व्यवस्था की जाएगी ताकि ग्रामीण अंचलों में बाल विवाह को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि मैं एक ओर गुवाहाटी में 22 वर्षीय युवती को स्नातकोतर में दाखिला लेते देखता हूं तो दूसरी ओर जब मैं (मुसलमानों की अधिक आबादी वाले) चेंगा या बागबर जैसे इलाकों में जाता हूं, तो मैं देखता हूं कि उसी आयु की युवती की गोद में दो बच्चे होते हैं और दो बच्चे उसके सामने होते हैं। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि विधायकों, चिकित्सकों और अभियंताओं की संतानें ज्यादा नहीं होतीं।
जब सरकार गरीबों के लिए कुछ करने, युवतियों को बचाने की कोशिश करती है तो वे लोगों को भड़काते हैं कि भाजपा उनके जीवन में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सामंती मानसिकता अपने लिए अलग तरह की जीवनशैली और गरीबों के लिए अलग जीवनशैली चाहती है। पुरकायस्थ ने सवाल किया कि पुलिस यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण संबंधी(पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत मामलों को साबित कैसे करेगी, क्योंकि पीड़िताएं अपने पति या माता-पिता के खिलाफ गवाही देने की संभवतःइच्छुक नहीं होंगी। इसके जवाब में शर्मा ने कहा कि यदि इस प्रकार के विवाह के बाद संतान हुई हैं तो अपराध को साबित करना समस्या नहीं होगी और यदि कोई संतान नहीं है, तो समस्या हो सकती है। बहरहाल, उन्होंने भरोसा जताया कि 90 प्रतिशत मामलों में अपराध साबित हो जाएंगे।