शिलांग : असम के अपने समकक्ष के दावे को खारिज करते हुए मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि विवादित अंतर्राज्यीय सीमा पर स्थित मुकरोह गांव मेघालय का हिस्सा है जहां पिछले साल हिंसक संघर्ष में छह लोग मारे गए थे। उन्होंने कहा कि मुकरोह के निवासी उनके नेतृत्व वाली सरकार की कई योजनाओं के लाभार्थी हैं। संगमा का बयान ऐसे वक्त आया है जब कुछ सप्ताह पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने विधानसभा में कहा था कि मुकरोह उनके राज्य का हिस्सा है।

संगमा ने विधानसभा को बताया कि मैंने स्पष्ट कहा है कि मुकरोह मेघालय का हिस्सा है। तथ्य और आंकड़े यही दर्शाते हैं। अन्य बयान दे सकते हैं, लेकिन हमारा रुख स्पष्ट है। उन्होंने वॉयस ऑफ पीपुल्स पार्टी के विधायक एडेलबर्ट नोनग्रुम द्वारा उठाए गए एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि सेंसस कोड बताते हैं कि मुकरोह वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले में आता है। हाल में मेघालय विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान मुकरोह में भी हुआ। गांव में 1,500 मतदाता हैं, दो मतदान केंद्र हैं और यह मोकाइव निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मुकरोह में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के 500 लाभार्थियो के साथ ग्राम रोजगार परिषद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में दो उचित दर की दुकानें हैं जिसके तहत 2,200 लोग लाभान्वित हैं और मेघालय सरकार द्वारा एक स्कूल तथा स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है। संगमा के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) या पीएमएवाईजी, जल जीवन एवं स्वच्छ भारत अभियान (एसवीएम) जैसी केंद्र की अन्य योजनाओं को भी गांव में लागू किया गया है। पिछले साल 22 नवंबर को अवैध रूप से काटी गई लकड़ी से लदे एक ट्रक को कथित तौर पर पड़ोसी राज्य के वन कर्मियों द्वारा रोके जाने के बाद विवादित सीमा पर हुई झड़प में मुकरोह के पांच और असम के एक वन रक्षक समेत छह लोगों की मौत हो गई थी। इस संघर्ष पर उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच संवाद एवं समन्वय की कमी के कारण कभी-कभी तनाव पैदा हो जाता है और हिंसा भड़क जाती है। उन्होंने कहा कि हमने महसूस किया कि इन तनाव से बचने के लिए हमारे समकक्षों के बीच संवाद और समन्वय बेहद जरूरी है।