इंदौर/भोपाल : इंदौर के बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में रामनवमी पर बड़ा हादसा हो गया। यहां हवन के दौरान अंडरग्राउंड बावड़ी की छत धंसने से 14 लोगों की मौत हो गई। बावड़ी में 30 से ज्यादा लोग गिरे थे। यह 40 फीट गहरी है। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से रस्सियों के सहारे कुएं से लोगों को निकाला। कुएं से 11 शव निकाले गए, जबकि 3 लोगों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा। बावड़ी में 4 से 5 फीट पानी भरा था। नगर निगम ने तीन पंप की मदद से पानी निकाला। जिसके बाद दोबारा रेस्क्यू शुरू किया। ऑक्सीजन के साथ गोताखोरों को कुएं में उतारा गया। मौके पर एनडीआरएफ की टीम भी पहुंची है। बताया गया कि बावड़ी बहुत गहरी है, जिसमें काफी दलदल भी है। आशंका है कि अभी भी कुछ लोग यहां दबे हैं। स्थानीय लोगों ने कुछ लोगों के गुम होने की बात भी कही है। रेस्क्यू के लिए महू से आर्मी की टीम भी बुलाई गई है। हादसा सपना संगीता रोड स्थित स्नेह नगर में हवन के दौरान हुआ।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लोग बावड़ी की छत पर बैठे थे। वजन से उसकी छत टूट गई और लोग नीचे गिर गए। यह मंदिर करीब 60 साल पुराना है। कलेक्टर ने घटना की मजिस्टि्रयल जांच कराने की बात कही है। वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हादसे पर दुख जताते हुए मारे गए लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है। जिलाधिकारी डॉ. टी. इलैयाराजा ने बताया कि हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की मदद से चलाए गए बचाव अभियान के तहत करीब 20 लोगों को बावड़ी से बाहर निकालकर बचाया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि मंदिर में हुए हादसे की मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हादसे में मारे गए सभी 11 लोगों के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन ऐसे सार्वजनिक स्थानों को चिह्नित करेगा, जहां इस तरह के हादसे होने की आशंका है। अधिकारियों ने बताया कि मंदिर के संकरी जगह में बने होने के कारण बचाव कार्य में बाधा आई और इस दौरान मंदिर की एक दीवार तोड़ कर पाइप इसके भीतर डाला गया और बावड़ी का पानी मोटर से खींचकर बाहर निकाला गया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मंदिर में पुरातन बावड़ी की छत पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ थी और छत ज्यादा लोगों का बोझ नहीं सहन कर सकी। रहवासियों ने बताया कि मंदिर पुरातन बावड़ी पर छत डालकर बनाया गया था। हादसे के बाद मंदिर के आस-पास उन चिंतित लोगों की भीड़ जुट गई जिनके परिजन हादसे के वक्त मंदिर में मौजूद थे। पटेल नगर रहवासी संघ के अध्यक्ष कांतिभाई पटेल ने इस बात पर नाराजगी जताई कि हादसे की सूचना दिए जाने के बाद भी एक घंटे तक मौके पर एम्बुलेंस नहीं पहुंची थी। अधिकारियों ने बताया कि हादसे में मारे गए लोगों की पहचान लक्ष्मी पटेल (70), भारती कुकरेजा (58), जयवंती खूबचंदानी (84), दक्षा पटेल (60), मधु भम्मानी (48), मनीषा मोटवानी (40), गंगा पटेल (58), कनक पटेल (32), पुष्पा पटेल (49), भूमिका ख़ानचन्दानी (31) और इंद्र कुमार हरवानी (53) के रूप में हुई है। चौहान ने भोपाल में मीडिया से कहा कि इंदौर में हुई दुर्घटना में नागरिकों के हताहत होने का समाचार अत्यंत दुःखद और हृदय विदारक है।

ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की क्षमता प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं। उन्होंने कहा कि दुःख की इस घड़ी में हम सब शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए तथा घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की जायेगी। घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था की जा चुकी है। चिकित्सा का संपूर्ण व्यय प्रदेश सरकार वहन करेगी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख जताया और मुख्यमंत्री चौहान से बात कर हालात की जानकारी ली। मोदी ने ट्वीट कर कहा कि इंदौर में हुए हादसे से बेहद दुखी हूं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात की और ताजा स्थिति की जानकारी ली। सभी प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के साथ मेरी प्रार्थना। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया  कि इंदौर में हुए हादसे में कई लोगों के निधन के समाचार से मुझे गहरा दुःख हुआ है। सभी शोक-संतप्त परिवारों के प्रति मैं गहन शोक-संवेदनाएं व्यक्त करती हूं तथा घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं।