नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए आज राजनीतिक इच्छाशक्ति की कोई कमी नहीं है और अधिकारियों को बगैर हिचकिचाहट के भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, भले ही वह कितना भी ताकतवर हो। उन्होंने भ्रष्टाचार को लोकतंत्र और न्याय की राह में सबसे बड़ा रोड़ा करार देते हुए यह भी कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्रमुख जिम्मेदारी भारत को इससे मुक्त कराना है।
सीबीआई के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देश और इसके नागरिकों की इच्छा है कि किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को दशकों तक भ्रष्टाचार से लाभ हुआ, उन्होंने एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है, जो जांच एजेंसियों पर हमला करता है, लेकिन एजेंसियों को भ्रष्टों की शक्ति और उन्हें कलंकित करने के लिए उनके बारे में फैलाई गई कहानियों से विचलित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये लोग आपका ध्यान भटकाते रहेंगे, लेकिन आपको अपने काम पर ध्यान देना होगा। किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हमारे प्रयासों में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। यह देश की इच्छा है, यह देश के लोगों की इच्छा है। देश, कानून और संविधान आपके साथ है। मोदी ने कहा कि आज देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति में कोई कमी नहीं है। आपको (सीबीआई) कहीं भी हिचकने, कहीं रुकने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत की आर्थिक शक्ति बढ़ रही है, अड़चनें पैदा करने वाले भी बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश के सामाजिक ताने-बाने, एकता और भाईचारे के साथ ही उसके आर्थिक हितों व संस्थानों पर भी नित्य प्रहार बढ़ते चले जा रहे हैं.. और इसमें जाहिर तौर पर भ्रष्टाचार का पैसा लगता है। इसलिए हमें अपराध और भ्रष्टाचार की प्रकृति को समझना होगा और इसके कारणों का पता लगाने के लिए जड़ तक पहुंचना होगा। मोदी ने कहा कि भारत को आजादी के समय भ्रष्टाचार की विरासत मिली। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि इसे दूर करने के बजाय कुछ लोग इस बीमारी को पोषित करते रहे। उन्होंने कहा कि ट्रिलियन डॉलर पर चर्चा इन दिनों मजबूत अर्थव्यवस्था को संदर्भित करती है, लेकिन एक दशक पहले जब सीबीआई ने अपनी स्वर्ण जयंती मनाई थी तो ऐसे आंकड़ों का उपयोग देश में घोटालों का वर्णन करने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि एक प्रतियोगिता चल रही थी कि कौन भ्रष्टाचार का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि घोटालों और दंडमुक्ति की मौजूदा भावना के कारण व्यवस्था ध्वस्त हो गई और नीतिगत पंगुता के माहौल ने विकास को एक ठहराव में ला दिया था। उन्होंने कहा कि इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई, पहले की ‘फोन बैंकिंग’ की समस्या के बिल्कुल विपरीत है, जहां प्रभावशाली लोगों के फोन कॉल के आधार पर हजारों करोड़ रुपए के ऋण मंजूर किए जाते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि लाभार्थी जनता का पैसा लेकर भाग गए। उन्होंने कहा कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की वजह से अब तक भगोड़े अपराधियों की 20,000 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। उन्होंने सीबीआई से कहा कि वह भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अपनी जांच में तेजी लाने के तरीके अपनाए, क्योंकि लंबित जांच भ्रष्टाचारियों को सुरक्षा प्रदान करती है, जबकि निर्दोष पीड़ित रहते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार कोई सामान्य अपराध नहीं होता। भ्रष्टाचार, गरीब से उसका हक छीनता है, अनेक अपराधों को जन्म देता है। भ्रष्टाचार, लोकतंत्र और न्याय के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा होता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मिशन मोड पर काले धन और बेनामी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारियों के अलावा हम भ्रष्टाचार के कारणों से भी लड़ रहे हैं। मोदी ने कहा कि पेशेवर और कुशल संस्थानों के बिना विकसित भारत का निर्माण संभव नहीं है और इसलिए सीबीआई की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने अपने काम से, अपने कौशल से सामान्यजन को एक भरोसा दिया है।
आज भी जब किसी को लगता है कि कोई केस असाध्य है तो आवाज उठती है कि मामला सीबीआई को दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां भी भ्रष्टाचार होता है, युवाओं को समान अवसर नहीं मिलते हैं और केवल एक विशेष पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलता है। भ्रष्टाचार को प्रतिभा का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए मोदी ने कहा कि यह भाई-भतीजावाद और परिवारवाद को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि जब ये दोनों बढ़ते हैं तो देश की ताकत प्रभावित होती है और जब ताकत कमजोर होती है तो इसका असर विकास पर भी पड़ता है।