नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने एक इंटरव्यू के दौरान हिमंत विश्वशर्मा के कांग्रेस छोड़न का मजेदार किस्सा सुनाया। इस दौरान गुलाम नबी आजाद ने राहुल गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए। वहीं गुलाम नबी आजाद के इस किस्से पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने भी प्रतिक्रिया दी है।

शर्मा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि गुलाम नबी आजाद की असफल कोशिशों के बाद भी मैं कांग्रेस में 12 महीनों तक रहा था। मोजो के साथ इंटरव्यू में गुलाम नबी आजाद ने बताया कि जब कांग्रेस में रहने के दौरान हिमंत विश्वशर्मा ने 40-45 विधायकों के साथ बगावत कर दी थी। हिमंत विश्वशर्मा मेरे ज्यादा करीब थे। साथ ही तत्कालीन राज्यपाल जेबी पटनायक भी मेरे करीबी थे।

ऐसे में हालात संभालने की जिम्मेदारी मुझे दी गई थी। पूर्व कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने बताया कि मैंने हिमंत विश्वशर्मा को अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली आने को कहा था। हिमंत विश्वशर्मा के समर्थन में 40-45 विधायक थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को भी अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली आने को कहा गया। हालात देखकर पता चला कि हिमंत के पास ज्यादा समर्थन था। गुलाम नबी आजाद बताते हैं कि उन्होंने स्थिति की जानकारी सोनिया गांधी को दी।

आजाद बताते हैं कि जब वह असम जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनके पास राहुल गांधी का फोन आया और उन्होंने पूछा कि क्या हम असम मुख्यमंत्री को बदलने के लिए जा रहे हैं? आजाद बताते हैं कि राहुल गांधी ने हमें जाने से मना कर दिया जबकि वह उस समय पार्टी के अध्यक्ष भी नहीं थे। गुलाम नबी आजाद ने बताया कि जब वह राहुल गांधी से मिलने पहुंचे तो मैंने देखा कि वह असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और उनके बेटे गौरव गोगोई के साथ चाय पी रहे थे।

राहुल गांधी ने कहा कि वह लोग तरुण गोगोई को क्यों परेशान कर रहे हैं? मैंने जवाब दिया कि मैं परेशान नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ मुझे दी गई जिम्मेदारी निभा रहा हूं। आजाद ने बताया कि मैंने राहुल गांधी को बताया था कि हिमंत विश्वशर्मा पार्टी छोड़ देंगे। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि जाने दो। आजाद ने बताया कि राहुल गांधी का ताकिया कलाम है कि जाने दो, जाने दो उसे आरएसएस में। गुलाम नबी आजाद के इंटरव्यू के इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने ट्वीट किया कि गुलाम नबी आजाद की विवाद सुलझाने की असफल कोशिश के बावजूद मैं 12 महीने तक कांग्रेस पार्टी में रहा। उन 12 महीनों की कहानी भी मजेदार है। मैंने आखिरकार अगस्त 2015 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी।