डिजिटल डेस्क: भारत की सीमा से सटे डोकलाम के पास एक बार फिर चीन की नई चाल का पर्दाफाश हुआ है और यहां चीन एक बार फिर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य में लगा हुआ है। ये निर्माण अमो चू नदी घाटी के पास हो रहा है,तथा इससे भारतीय सेना के लिए चिंता पैदा हो गई है। मो चू नदी डोकलाम के पास है और भारत-चीन-भूटान डोकलाम ट्राई-जंक्शन से कुछ ही दूरी पर है। पीएलए सैनिकों के स्थाई ठिकानों के साथ-साथ अमो चू नदी के पास संचाव टावरों को भी देखा जा सकता है और हजारों सैनिकों के रहने की व्यवस्था करते हुए हाल के महीनों में लगभग हजार स्थाई सैन्य झोपड़ियां के साथ कई अस्थायी शेड बनाए गए हैं।

भारत की सुरक्षा पर चीनी गतिविधियों से खतरा:

अमो चू नदी पर चीनी निर्माण से भारत की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है और जब से चीनी सेना को डोकलाम में भारतीय सेना से कड़ी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है तभी से पीएलए एक वैकल्पिक तरीके से उसी रिज तक पहुंचने का प्रयास कर रही है ताकि वह डोकलाम के पश्चिम में भारतीय सुरक्षा को बायपास कर सके।

इंडियन सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर डोकलाम पर चीन का नियंत्रण होता है तो इससे उसे रणनीतिक लाभ मिलेगा तथा इससे भूटान और सिक्किम के बीच स्थित चुंबी घाटी के साथ-साथ, डोकलाम से दक्षिण में रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर की स्थिति भी देखी जा सकेगी।

अब ऐसे में भारत चीन को डोकलाम से दूर रखना चाहता है ताकी इससे सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर कोई खतरा ना मंडराए और इसलिए साल 2017 में भी जब चीन ने डोकलाम में सड़क बनानी शुरू की थी तब भारत ने चीन को रोककर उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया था।

इससे पहले भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग का एक बयान ने भी भारत के लिए चिंता का सबब बन गया था,उन्होंने कहा था कि डोकलाम मुद्दे पर समाधान ढूंढने पर चीन का भी उतना ही अधिकार है जितना भूटान का हैं और उन्होंने कहा था कि इस समस्या को भूटीन, चीन और भारत तीनों को मिलकर हल करनी होगी।