डिजिटल डेस्क: लगभग तीन साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है दुनियाभर में कोरोना वायरस को फैले, लेकिन अब भी ये वायरस हर कुछ समय बाद एक नई चुनौती बनकर उभर जाता है और इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। फरवरी तक लग रहा था कि देश में अब कोवि़ड हमेशा के लिए खत्म होने वाला है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और मार्च से केस फिर से बढ़ने लगे, जो अबतक थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और एक्टिव केस 60 हजार से ज्यादा हो चुके हैं।

कई राज्यों में दैनिक मामले हर दिन बढ़ रहे हैं और सरकार भी कोविड के बढ़ते मामलों को नई लहर मान चुकी है। वायरस की रोकथाम के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन वायरस से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण हथियार की कमी हो गई है।

देश में वैक्सीनेशन की स्थिति:

अधिकतर राज्यों में टीके का स्टॉक ही खत्म हो गया है और देशभर में केवल 100 के आसपास साइटों पर वैक्सीनेशन हो पा रहा है तथा देश की राजधानी दिल्ली में 6 और महाराष्ट्र के मुंबई में केवल 3 केंद्रों पर टीकाकरण किया जा रहा है और यही हाल कई अन्य राज्यों का भी है। आलम यह है कि पिछले एक दिन में 200 से भी कम डोज लगाई गई हैं। कोविड के बढ़ते दायरे की वजह से फिर से टीकों की मांग बढ़ रही है। लेकिन टीकाकरण अभियान रफ्तार नहीं पकड़ रहा है।

क्यों और क्या टीकों कमी से खड़ी होगी नई मुसीबत?:

अगर बात करे वैक्सीन की कमी के बारे में तो इसके लिए फरवरी के महीने में जाते हैं, उस दौरान देश में कोरोना के केस सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे और कोविड का डर खत्म हो गया था, दोनों डोज ले चुके लोग तीसरी वैक्सीन नहीं लगवा रहे थे और केवल बुजुर्गों और कोमोरबिडिटी वालों ने तीसरी खुराक ली थी। सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि बीते 6 महीनों से वैक्सीन की डिमांड काफी कम हो गई थी। इस वजह से टीका बनाने वाली कंपनियों ने भी प्रोडक्शन बंद कर दिया था और अधिकतर राज्यों में तो 15 फरवरी तक स्टॉक समाप्त हो गया था, सरकारी ही नहीं प्राइवेट अस्पतालों में भी टीकाकरण रोक दिया गया था। 

लेकिन मार्च में कोविड से तस्वीर फिर से बदलने लगी, और अब अप्रैल में मामले लगातार बढ़ रहे हैं तथा इससे टीके की मांग फिर से हो रही है, लेकिन स्टॉक न होने की वजह से वैक्सीनेशन नहीं हो पा रहा है। और  हालांकि अब सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड को बनानाा फिर से शुरू किया है, लेकिन अधिकतर राज्यों में ये अभी भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है और  टीकों की सप्लाई में समय भी लग सकता है।

टीके की कमी से वायरस को फिर से पनपने का मौका मिल जाएगा ?:

महामारी विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार कहते हैं कि देश में अधितकतर आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है और करीब 220 करोड़ डोज लगाई जा चुकी हैं तथा  हाई रिस्क वालों ने बूस्टर डोज ली है। वायरस की वजह से लोगों में नेचुरल इंफेक्शन हो चुका है और हर चार से छह महीने में लोग संक्रमित होते रहते हैं और  जिससे वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनी हुई है अब  ऐसे में कोविड से कोई खतरा नहीं है।

फिलहाल केस बढ़ भी रहे हैं तो हॉस्पिटलाइजेशन न के बराबर है,और  मौतें भी उन लोगों की हो रही है, जिनको पहले से गंभीर बीमारियां हैं। इसलिए ऐसा नहीं होगा कि वैक्सीन की कमी से वायरस फिर से पनपने लगेगा और फिलहाल जरूरी है कि लोग खुद का ध्यान रखें और टीकों की आपूर्ति होने पर बचे हुए लोग बूस्टर लगवा लें।

यूनिवर्सल टीके की जरूरत:

महामारी विशेषज्ञ डॉ युद्धवीर सिंह कहते हैं कि अब देश को एक यूनिवर्सल वैक्सीन की जरूरत है, जो कोविड के सभी वेरिएंट्स पर काम कर सके, चूंकि हर कुछ महीनों में वायरस बदलता रहता है तो उसके हिसाब से टीकों को भी अपग्रेड करने की जरूरत है और  ऐसी वैक्सीन बनानी को कोशिश करनी चाहिए जो हर वेरिएंट पर असरदार रहे।