खार्तूम : सूडान में मिलिट्री और पैरामिलिट्री के बीच जारी लड़ाई 24 घंटों को लिए थमेगी। ये आज शाम 6 बजे से लागू हो गई। इसके लिए दोनों गुटों के बीच एक समझौता हुआ है। अल- अरेबिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच दोनों के बीच कुछ समझौता कराए जाने की कोशिश हो सकती है। इससे पहले सेना के चीफ ने कहा था कि लड़ाई में पैरामिलिट्री को कुछ पड़ोसी देशों का साथ मिल रहा है। हालांकि, उन्होंने इन देशों के नाम नहीं बताए थे। वहीं, लड़ाई के बीच कर्नाटक के 31 आदिवासी सूडान में फंस गए हैं। सभी लोग सूडानी शहर अल-फशेर में रह रहे हैं। ये लोग आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी बेचने के लिए सूडान गए थे। इनमें से 19 लोग कर्नाटक के हुनसूर, 7 शिवामोगा और 5 लोग चन्नागिरी के रहने वाले हैं।
सूडान में फंसे भारतीयों में से एक एस. प्रभू ने बताया कि हम पिछले 4-5 दिनों से एक किराए के मकान में फंसे हुए हैं। हमारे पास खाना या पीने के लिए कुछ भी नहीं है। बाहर से लगातार धमाकों की आवाज आ रही है। यहां कोई हमारी मदद करने को तैयार नहीं है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर कन्नड़ विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सूडान में फंसे भारतीयों के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है। उन्हें उनकी किस्मत के भरोसे छोड़ दिया गया है। वहीं, सूडान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 200 हो गई है। सोमवार को आरएसएफ के लड़ाकों ने अमरीकी दूतावास के काफिले पर भी हमला कर दिया। इसकी जानकारी अमरीका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मंगलवार को दी।
उन्होंने बताया कि काफिले की गाड़ियों पर अमरीका का झंडा लगा हुआ था। साथ ही उसकी लाइसेंस प्लेट भी दूतावास की थी। फिर भी हमला किया गया। ब्लिंकन ने बताया कि वो हमले की जांच कर रहे हैं। सूडान में सिर्फ अमरीकी काफिले पर ही नहीं, बल्कि आरएसएफ और सेना के बीच की लड़ाई में ईयू के एम्बेस्डर एडन ओ हारा पर भी हमला हुआ। दरअसल, आरएसएफ के कुछ लड़ाके दरवाजा तोड़कर ओ हारा के घर घुस गए। उन्हें गनपॉइंट पर रखकर उनसे सारे पैसे लूट लिए। हालांकि, इस हमले उन्हें मामूली चोट आई।
ओ हारा ने हमलावरों की पहचान उनकी यूनिफॉर्म से की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक खार्तूम की गलियों में लगातार इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। दोनों गुट टैंक, आर्टिलरी और खतरनाक हथियारों से लड़ रहे हैं। सूडान में लड़ रहे दोनों गुटों को अलग-अलग देशों का समर्थन है। अलजजीरा के मुताबिक आर्मी को मिस्र का साथ है, जबकि पैरामिलिट्री ग्रुप को यूएई और सऊदी अरब से मदद मिलती रही है।