डिजिटल डेस्क: भारत और रूस का वेंचर ब्रह्मोस एयरोस्पेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेचने के लिए इंडोनेशिया के साथ बातचीत कर रहा है और यह सौदा अनुमानित $200 मिलियन का हो सकता है। ब्रह्मोस का प्रयास है कि वह 2024 के अंत तक 2 बिलियन डॉलर का निर्यात कर सके तथा यह कदम पीएम नरेंद्र की ओर से निर्धारित 5 बिलियन डॉलर के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा। 

सवाल : क्या ब्रह्मोस 2025 तक प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित 5 अरब डॉलर के रक्षा निर्यात लक्ष्य का आधा हासिल कर सकता है?

 जवाब : प्रधानमंत्री ने पूरे रक्षा उद्योग के लिए निर्यात का लक्ष्य रखा है. मेरा मानना ​​है कि ब्रह्मोस अपने दम पर इसे हासिल कर सकती है और  यदि हम इस लक्ष्य को नहीं पा पाए तो भारतीय रक्षा उद्योग निश्चित तौर पर इसमें शामिल होगा। मैं उम्मीद करता हूं कि हम अगले साल के अंत तक करीब 2 अरब डॉलर और उसके अगले साल 5 अरब डॉलर का निर्यात कर सकेंगे।

सवाल : अगले 10 साल में आप खुद को कहां देखते हैं? 

जवाब : हम अगले दो वर्ष में जो करने जा रहे हैं, उसे वार्षिक आधार पर दोगुना करें। तो हम 8-10 अरब डॉलर के निर्यात के करीब पहुंच सकते हैं।

सवाल : क्या आपका अगला निर्यात सौदा इंडोनेशिया के साथ हो रहा है? क्या इस संबंध में आपकी टीम इंडोनेशिया जा रही है? 

जवाब : हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं, इनमें से इंडोनेशिया के साथ लंबे समय से बातचीत चल रही है और  हम आशान्वित हैं, जकार्ता में हमारी टीम आ-जा रही है, इन यात्राओं के साथ हम एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं।

सवाल : आप किस मिसाइल संस्करण को निर्यात करने की योजना बना रहे हैं? 

जवाब : दो वर्जन हैं, पहला एंटी शिप मिसाइल और लैंड अटैक मिसाइल. ज्यादातर देश एंटी शिप मिसाइल में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और यह ग्राउंड आधारित लांचर है जो युद्धपोतों को टारगेट कर सकता है। खास बात ये है कि इसे पानी के जहाज और एयरक्राफ्ट से भी लांच किया जा सकता है तथा इसे ही हम बेचने की कोशिश कर रहे हैं।

सवाल : आपने फिलीपींस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. क्या इससे एक्सपोर्ट का रास्ता मिला है? 

जवाब : फिलीपींस ने हमारे साथ 37.5 करोड़ डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं और यह काफी छोटा सोदा है, लेकिन हम आने वाले दिनों में बड़े सौदों की तलाश कर रहे हैं। जहां तक फिलीपींस सौदे का सवाल है, अगले ढाई साल में हमें मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी करनी होगी और साल के अंत तक हम डिलीवरी शुरू कर देंगे। यह अगले वर्ष की पहली तिमाही में फिलीपींस में एक प्रणाली के रूप में चालू हो जाएगा तथा यह कोस्टल मिसाइल बैटरी होगी जो एंटी-शिप मिसाइल के तौर पर एक मोबाइल लॉन्चर है और यह फिलीपींस में तीन स्थानों पर होगा।

सवाल : अन्य खरीदार कौन हैं? क्या दक्षिण पूर्व एशिया आपके लिए एक संभावित बाजार है? 

जवाब : पूरी दुनिया हमसे हथियार खरीदने में दिलचस्पी रखती है, लेकिन हम हर किसी को हथियार नहीं बेच सकते और  हम केवल उन्हीं देशों को हथियार बेच सकते हैं जो भारत के मित्र हैं और रूस जिन्हें मान्यता देता है तथा इसीलिए हम दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य पूर्व, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को टारगेट कर रहे हैं और इनमें से कई देशेां के साथ बातचीत चल रही है। इनमें से 5-6 ऐसे हैं जिसे बातचीत चल रही है और बहुत ही जल्दइसका रिजल्ट भी देखने को मिलेगा,और  ये कहना ठीक होगा की फिलीपींस सौदे ने निश्चित तौर पर हमारे लिए अन्य देशों के दरवाजे खोल दिए हैं।

सवाल : दक्षिण पूर्व एशिया आपके लिए लक्षित बाज़ार क्यों है? 

जवाब : दक्षिण पूर्व एशिया दो या तीन कारणों से बड़ा बाजार बन जाता है. पहला कारण है भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, दूसरा कारण ये है कि इस क्षेत्र के देश दूसरे देशों से अपनी समुद्री सीमा को सुरक्षित करना चाहते हैंऔर वेस्ट फिलीपींस सागर में भी बहुत समस्याएं हैं। फिलीपींस और दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य देश समान कारणों की वजह से ऐसे सिस्टम की तलाश में हैं और मध्य पूर्व के देश भी कतार में है तथा इसीलिए हम उनके साथ वन टू वन बातचीत कर रहे हैं।

सवाल : आपने कहा है कि कई देश ब्रह्मोस मिसाइलों की मांग कर रहे हैं? उन्हें रूस या पश्चिम के बजाय भारत से आयात करने का विकल्प क्यों चुनना चाहिए? 

जवाब : ब्रह्मोस की जरूरत स्पष्ट है, यह एक सामरिक निवारक है और आप सरल प्रणाली से 300 किलोमीटर तक की सीमा को सुरक्षित करते हैं तथा यह एक असाधारण प्रणाली है। दुनिया की सभी एंटी शिप मिसाइलें सब सोनिक हैं,ब्रह्मोस इकलौती सुपरसोनिक मिसाइल है, इसलिए हर कोई इसे चाहता है। हमारे लिए दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य पूर्व में रक्षा कूटनीति शुरू करना आसान है।

सवाल : ब्रह्मोस कितना स्वदेशी है? 

जवाब : ब्रह्मोस एक हथियार प्रणाली है और जमीनी प्रणाली के रूप में, यह कमोबेश पूरी तरह से स्वदेशी है और  मिसाइल सिस्टम की बात करें तो ज्यादातर रूस के हैं, लेकिन इसका डिजाइन पूरी तरह स्वदेशी है। जब 1998 में हमने इसकी शुरुआत की थी तब हमारे पास सिर्फ13% भारतीय उपकरण थे. 2001 में हमने ट्रायल किया था। 2004 में पहला ऑर्डर नौसेना से आया था और इसके बाद ये भारतीय सेना और वायुसेना में शामिल हुई।  मार्च में हमने भारतीय नौसेना के जहाजों में से एक से इसका एक और परीक्षण किया था और इसी के साथ हम 78% स्वदेशी प्रणाली स्तर पर पहुंच गया है।

सवाल : अब इसका कितना स्वदेशीकरण रह गया है? 

जवाब : हम इसके पूरी तरह से स्वदेशीकरण के बहुत करीब है और  अगले सात आठ सवाल में हम इसे 95% तक स्वदेशी कर लेंगे।

सवाल : क्या आपका भारतीय नौसेना के साथ कोई समझौता है? 

जवाब : भारतीय नौसेना हमारी प्रमुख ग्राहक है और उन्होंने ये ऐलान किया है कि ब्रह्मोस उनका अग्रिम पंक्ति का हथियार है तथा उन्होंने ब्रह्मोस को तैनात करने के लिए अपने 13 जहाजों को चुना है।

सवाल : अब आप किन नई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं? 

जवाब : अब हम ब्रह्मोस की अगली पीढ़ी पर काम कर रहे हैं और हमने प्रारंभिक डिजाइन तैयार कर ली है, उम्मीद करते हैं किअगले साल की शुरुआत में इसकी डमी तैयार कर लेंगे और साल के अंत तक उड़ान का परीक्षण भी हो जाएगा। इसके बाद हमारा निर्यात आज के मुकाबले चार गुना अधिक तक पहुंचने की उम्मीद है और इसे ब्रह्मोस एनजी कहा जाएगा,खास बात ये है कि अगली पीढ़ी में इसका वजन आधा हो जाएगा और रेंज इतनी ही रहेगी।

अभी अगर देखें तो ब्रह्मोस एयर लांच वर्जन का वजन 2550 किग्रा है, अगली पीढ़ी में इसे 1350 किग्रा से कम पर लाना है और इससे Su30 फाइटरजेट एक साथ दो ब्रह्मोस मिसाइल कैरी कर सकेगा, अभी सिर्फ एक ही मिसाइल कैरी की जा सकती है। इसके अलावा हम हल्के लड़ाकू विमानों के लिए भी ब्रह्मोस का एक वर्जन तैयार करने पर विचार कर रहे हैं और फिलहाल देश में 200 इंडस्ट्री के साथ हमारी पार्टनरशिप है, NG के साथ ये 250 हो सकती हैं। सोचिए ये कितना शानदार संयोजन होगा, हम LCA, DRDO की एस्ट्रा मिसाइल और ब्रह्मोस एक पैकेज के रूप में दुनिया को दें।