गुवाहाटी : असम में एक राज्यव्यापी कवायद के दौरान किए गए आकलन के मुताबिक सरकारी स्कूलों ने इस वर्ष 2022 की तुलना में सुधार दिखाया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्चतम ए-प्लस ग्रेड की श्रेणी में रखे गए स्कूलों की संख्या बढ़ रही है और निम्नतम श्रेणी में आने वाले स्कूलों की संख्या कम हो रही है। इसमें कहा गया कि शीर्ष प्रदर्शन करने वाली श्रेणियों में रखे गए छात्रों की संख्या भी पिछले वर्ष की तुलना में 2023 में बढ़ी है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को यहां 'गुनोत्सव 2023Ó के नतीजे जारी किए। इसमें राज्य के सभी 31 जिलों के 44,531 विद्यालयों और 41,35,163 (99.69 प्रतिशत) छात्रों को शामिल किया गया था। इस कवायद में सरकारी/अनुदान प्राप्त, चाय बागान प्रबंधन विद्यालय, चाय बागान आदर्श विद्यालय, आदर्श विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और आवासीय विद्यालयों के पहली कक्षा से 9वीं कक्षा तक के बच्चों को शामिल किया गया। इस सूची में शिवसागर ने पहला, चराइदेव ने दूसरा और गोलाघाट ने तीसरा स्थान हासिल किया।
राज्य के शिक्षा मंत्री रानोज पेगु द्वारा ट्विटर पर साझा की गई सूची के अनुसार, नीचे के तीन जिले पश्चिम कार्बी आंग्लोंग, चिरांग और कार्बी आंग्लोंग हैं। कामरूप मेट्रो सूची में 29वें स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर संतोष व्यक्त किया और इस पहल की सराहना भी की। परिणामों की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परिणाम राज्य में शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार को दर्शाते हैं। नतीजों पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि कुछ लोग गुणोत्सव को विफल करने का काम करते रहे हैं। गुणोत्सव ने साबित कर दिया है कि अच्छा हमेशा अच्छा होता है। पहले स्कूलों में गलत छात्रों के प्रवेश की खबरें रहती थीं, अब ऐसा नहीं है। अब सरकारी धन का ईमानदारी से उपयोग हो रहा है। अब हर छात्र का डिजिटल डाटा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों ने अच्छा परिणाम दिया है। सीएम ने उन तीन जिलों पर भी चिंता जताई जो गुणोत्सव के अंतिम पायदान पर हैं। सीएम ने इन तीन जिलों में शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा की वकालत की।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार मई में 6,000 नए शिक्षकों की भर्ती करेगी। सीएम शर्मा ने बुनियादी ढांचे की कमी को सुधारने के लिए ए प्लस ग्रेड प्राप्त करने वाले सभी स्कूलों को 25,000 रुपए की वित्तीय सहायता देने की भी घोषणा की। इस साल 'ए-प्लस श्रेणी के विद्यालयों का प्रतिशत 28.64 प्रतिशत है, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 11.56 प्रतिशत था। श्रेणी 'ए में रखे गए स्कूल भी 2023 में बढ़कर 46.19 प्रतिशत हो गए, जो पिछले साल 40.69 प्रतिशत थे। दूसरी ओर, श्रेणी बी, सी और डी में स्कूलों का प्रतिशत 2022 में क्रमश: 31.54, 11.13 और 5.08 की तुलना में इस वर्ष घटकर 18.58, 4.75 और 1.85 प्रतिशत रह गया है। रिपोर्ट में 86.50 प्रतिशत और उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले स्कूलों को ए-प्लस श्रेणी में, 73.50 से 86.49 प्रतिशत के बीच 'ए' में , 60.50 से 73.49 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वालों को 'बी' में, 48.50 से 60.49 प्रतिशत वालों को 'सी' में और 0-48.49 प्रतिशत के बीच अंक हासिल करने वालों को डी श्रेणी में रखा गया है। 'ए-प्लस और 'ए' श्रेणियों में रखे गए छात्रों का प्रतिशत 2023 में बढ़कर 38.16 और 32.51 प्रतिशत हो गया, जो पिछले वर्ष क्रमश: 23.79 और 25.64 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में 21.20, 12.58 और 16.78 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष बी, सी और डी श्रेणी में छात्रों के प्रतिशत में 16.57, 6.37 और 6.39 प्रतिशत की गिरावट आई है।