डिमापुर : नगालैंड की वाणिज्यिक राजधानी कहे जाने वाले डिमापुर शहर में अब एक बार फिर इनर लाइन परमिट का मुद्दा गरमा गया है। नगालैंड विधानसभा चुनाव के बाद अचानक वाणिज्यिक राजधानी डिमापुर में इनर लाइन परमिट लागू करने को लेकर नगालैंड सरकार की ओर से जारी एक अधिसूचना के बाद अब शहर में रह रहे गैर जनजाति लोगों की ङ्क्षचताएं बढ़ गई हैं। खासतौर पर रोजाना अपने विभिन्न कामों के लिए डिमापुर आने-जाने वाले लोग परेशान-ए- हाल दिख रहे हैं। उनके चेहरे पर उनकी व्याकुलता व असमंजस स्पष्ट रुप से दिख रही है।
बता दें कि डिमापुर को नगालैंड की वाणिज्यक राजधानी कहा जाता है। खासतौर पर इस फैसले से व्यापारियों का व्यापार प्रभावित होने की पूरी संभावना है। ऐसी स्थिति में उनमें दहशत का आलम है। डिमापुर में न केवल नगालैंड के लोग, बल्कि भारी संख्या में बाहर से लोग अपने कई कार्यों से आते हैं। खासकर पड़ोसी राज्य असम के सीमावर्ती लोग डिमापुर बेहतर लाज के लिए जाते हैं। इसके अलावा बाजार-हाट के लिए भी लोग रोजाना लाखों की संख्या में डिमापुर पहुंचते हैं। इतना ही नहीं बड़ी तादाद में श्रमिक भी रोजाना काम करने के लिए वहां जाते हैं।
वे भी असमंजस में हैं कि आखिर उनका क्या होगा? वहीं नगालैंड सरकार के आदेश अनुसार डिमापुर के जिला उपायुक्त कार्यालय द्वारा गत 19 अप्रैल 2023 को एक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें कहा गया कि नगालैंड के डिमापुर जिले में प्रवेश करने वाले प्रत्येक गैर-स्वदेशी व्यक्ति के पास इनर लाइन परमिट (आईएलपी) होना चाहिए।
इसके अलावा अन्य एक बिंदु में कहा गया कि प्रत्येक गैर -स्वदेशी व्यक्ति जो नगालैंड के डिमापुर में बसे हुए हैं या जिन्होंने 21 नवंबर1979 के बाद डिमापुर जिले के किसी भी क्षेत्र में प्रवेश किया है और जिन्होने अब तक इनर लाइन परमिट प्राप्त नहीं किया है,उन्हें अनिवार्य रूप से डिमापुर जिला उपयुक्त के कार्यालय से आईएलपी प्राप्त करना आवश्यक है। इसमें साफ कहा गया है कि इस अधिसूचना के जारी होने के 30 दिनों के भीतर अगर कोई इनर लाइन परमिट नहीं लेता या इसे दिखाने में विफल होता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कारवाई शुरू की जाएगी।