डिजिटल डेस्क: आईटीसी मौर्य पर दो करोड़ के जुर्माने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग पर CJI ने कहा कि 4 मई को मामले में सुनवाई करेंगे। 2018 में ITC मौर्य होटल में एक मॉडल के गलत तरीके से बाल काटने को लेकर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने 2021 में 2 करोड रुपए का जुर्माना लगाया था तथा जिसके खिलाफ होटल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग को अपने आदेश पर पुनरीक्षण करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अमल करने के बाद आयोग ने अपना पूर्ववर्ती आदेश बरकरार रखा है।आयोग ने सितंबर 2021 में पीड़ित मॉडल को दो करोड़ रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था और अदा करने का मूल यानी पहला आदेश दिया था तथा इसके अलावा 2018 में जब ये घटना हुई थी तब से भुगतान करने तक 9 फीसद ब्याज का भी भुगतान करने का आदेश था।

सैलून ने गलत तरीके से काटे थे बाल:

आयोग के आदेश को आईटीसी मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी तो कोर्ट ने आयोग से इस आधार पर पुनर्विचार करने को कहा कि शिकायतकर्ता के आरोपों के साथ होटल प्रबंधन का पक्ष भी सुनकर फैसला किया जाए और मॉडल आशना रॉय अपने एक जॉब इंटरव्यू के लिए 12 अप्रैल 2018 को आईटीसी मौर्य के सलून में गई थी। इस दिन उनकी रेगुलर हेयर ड्रेसर की गैर हाजिरी में दूसरी ड्रेसर ने उनके बाल ऐसे बेहूदा ढंग से कतर कर छोटे दिए कि वो सदमे में चली गई थी और  उनके शिकायत करने पर सलून प्रबंधन ने फ्री हेयर ट्रीटमेंट की पेशकश की।

हालांकि उससे बाल और रूखे और बेरंगत हो गए और रॉय ने अपनी शिकायत के साथ साथ आयोग और सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इसकी शिकायत करने पर होटल में स्थित सलून का स्टाफ अपमानजनक लहजे में बदतमीजी पर उतर आया। ऐसी हालत में उनका इंटरव्यू का अवसर भी हाथ से निकल गया और इस तरह वो जीवन का सबसे अहम अवसर चूक गई।

आयोग ने दो करोड़ का लगाया था जुर्माना:

इस बात की शिकायत के साथ रॉय ने आईटीसी मौर्य होटल को लिखित माफी मांगने के साथ तीन करोड़ रुपए मुआवजा का दावा उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग के समक्ष ठोका और आयोग में जस्टिस आरके अग्रवाल और डॉक्टर एसएम कांटिकर ने 2021 में दो करोड़ रुपए मय नौ फीसदी ब्याज अदा करने का आदेश मौर्य होटल को दिया।

होटल ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इसे चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट में रॉय ने अपना पक्ष खुद रखा। कोर्ट ने आयोग से अपने आदेश पर पुनर्विचार करने को कहा लेकिन आयोग के पुनर्विचार के दौरान भी अपने आदेश में कोई खामी नहीं मिली।