गुवाहाटी : मुख्यमंत्री के निगरानी प्रकोष्ठ ने असम स्टेट काउंसिल फॉर एजुकेशन, रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) में 105 करोड़ रुपए के घोटाले का पर्दाफाश किया है। दूरस्थ एवं मुक्त शिक्षा प्रशिक्षण के नाम पर डीएलएड कोर्स चलाने के नाम पर गबन करने वाली एससीईआरटी की तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष एवं निदेशक शेवाली   देवी शर्मा फिलहाल फरार हैं। सीएम विजिलेंस ने बुधवार को 105 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोपियों में से एक शेवाली देवी शर्मा के सबसे बड़े दामाद व ठेकेदार राजेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया। असम प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेता ठेकेदार राजेश जोशी जहां विजिलेंस के जाल में फंस गए, वहीं घोटाले के एक अन्य आरोपी ठेकेदार और शेवाली देवी शर्मा के छोटे दामाद अजीत पाल सिंह गिरफ्तारी के डर से छिपे हुए हैं। ताजा विभागीय जांच में एससीईआरटी की तत्कालीन निदेशक शेवाली देवी के कार्यालय में वर्ष 2017 से 2022 तक घोटाले का खुलासा होने के बाद शिक्षा विभाग ने सीएम विजिलेंस के यहां मामला दर्ज कराया है।

मामले के बाद राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी शेवाली देवी को तत्काल निलंबित कर दिया। उसने पहले एक सतर्कता मामले में गिरफ्तारी के डर से अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अपील की थी। इस घोटाले में शेवाली देवी के साथ उनके दो दामाद सहित 10 लोगों को आरोपित किया गया। सीएम विजिलेंस ने उन्हें बुधवार को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था। बुधवार को ठेकेदार राजेश जोशी, एससीईआरटी के उप निदेशक लक्ष्मी नारायण सोनवाल, लेखाकार जयचंद्र लहकर, स्टेनोग्राफर रमीजुद्दीन अहमद, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रूबुल अली व ठेकेदार सारंग मौर सतर्कता कोश के कार्यालय में पेश होने के बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। दो ठेकेदारों समेत छह अधिकारियों व कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ने गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम के समीप साउकुची स्थित शेवाली देवी के फ्लैट पर छापा मारा लेकिन आरोपी आईएएस अधिकारी छिप गयी।

जांच अधिकारी ने कहा कि शेवाली देवी के छोटे दामाद और आरोपी ठेकेदार अजीत पाल सिंह भी छिपे हुए हैं और उनका मोबाइल भी बंद है। इस मामले में दो अन्य व्यक्ति राहुल अमीन और कंकनज्योति दास के नाम भी आरोपियों की सूची में हैं। जांच अधिकारी के सूत्रों ने बताया कि जब शेवाली देवी एससीईआरटी की निदेशक थीं, तब उन्होंने एनसीटी द्वारा डीएलएड पाठ्यक्रमों के प्रशिक्षण के लिए राज्य में 22 केंद्रों को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, एनसीटीई ने 59 अन्य केंद्रों के माध्यम से डीएलई में दूरस्थ और खुली शिक्षा प्रदान करने के लिए एससीईआरटी को मंजूरी दी थी। हालांकि, शेवाली देवी ने निर्देश का उल्लंघन किया और अवैध रूप से डीएलएड प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या में वृद्धि की यानी 288 प्रशिक्षण केंद्र बिना अनुमति के खोले जा रहे हैं नियमों के अनुसार एससीईआरसी को 27,897 शिक्षकों को डीएलई प्रशिक्षण देना था, लेकिन शेवाली देवी ने दिखाया कि उन्होंने फर्जी केंद्रों के माध्यम से 1,06,828 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया था।

उसने कथित तौर पर बैंक खाते भी खोले और विभागीय अनुमति के बिना अवैध रूप से शिक्षित उम्मीदवारों से पैसे एकत्र किए। उसने अपने दो दामादों राजेश जोशी और अजीत पाल सिंह के स्वामित्व वाले फर्मो को स्मार्ट क्लास रूम के नाम पर एससीईआरटी के तहत पॉकेट टेंडर के माध्यम से करोड़ों रुपए के ठेके भी दिए। दोनों दामादों ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शौचालय निर्माण के लिए करोड़ों रुपए के ठेके भी लिए। जहां स्मार्ट क्लासरूम एसी कमरे में होना चाहिए वहीं शेवाली देवी के दामाद द्वारा बनाए गए स्मार्ट क्लासरूम में छह खिड़कियों वाले एक छप्पर वाले कमरे भी देखे गए। शेवाली देवी ने सभी ठेके अपने दामाद और रिश्तेदारों के नाम पर कुल आठ फार्मों को दे दी थी। उन्होंने फर्जी डीएलई प्रशिक्षण केंद्रों के नाम पर विभागीय कर्मचारियों के निजी बैंक खातों में भी पैसा ट्रांसफर किया और एएसईआरटी के कई तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मासिक कमीशन दिया।