इंफाल: मणिपुर में हुई जातीय हिंसा में मरने वालों की संख्या बढक़र 54 हो गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इंफाल घाटी में शनिवार को जनजीवन सामान्य होता नजर आया क्योंकि दुकानें एवं बाजार फिर से खुले और सडक़ों पर कार भी चलती दिखीं। हालांकि गैर आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हिंसा में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं ओर 200 से अधिक घायल हुए हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने पूर्वोत्तर राज्य में शांति की अपील के साथ-साथ जातीय समुदायों के बीच एक संवाद शुरू करने की अपील की। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के इतर कहा कि कई लोगों की जान चली गई है और संपत्ति को नुकसान हुआ है। चाहे मेइती हों या कुकी, दोनों एक ही राज्य के हैं और उन्हें एक साथ रहने की जरूरत है।  समाज तभी प्रगति कर सकता है जब शांति हो। सेना और केंद्रीय पुलिस बलों को हवाई मार्ग से लाकर मणिपुर में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ायी गई है।

वहीं यह चीज तब स्पष्ट नजर आयी जब ‘पीटीआई-भाषा’ की टीम ने प्रमुख सडक़ों और क्षेत्रों का दौरा किया। छात्रों समेत करीब 500 लोग इंफाल हवाईअड्डे पर नजर आये जो हिंसा प्रभावित राज्य से हवाई मार्ग से बाहर निकलने की कोशिश में हैं। इंफाल घाटी और उसके आसपास के पहाड़ी जिलों में भडक़े दंगों के शरणार्थियों के लिए विभिन्न सरकारी भवनों में कई अस्थाई शिविर स्थापित किए गए हैं। 13,000 से अधिक लोगों ने सेना और राज्य सरकार द्वारा राज्य के भीतर स्थापित विभिन्न आश्रयों और आम लोगों द्वारा स्थापित अस्थायी शिविरों में शरण ली है, जबकि कई अन्य पड़ोसी राज्यों मिजोरम, मेघालय और नगालैंड चले गए हैं।

शुक्रवार को जिन इलाकों में उग्रवादी समूहों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी हुई थी, वहां सडक़ों पर बेरीकेड लगाकर और घेराबंदी करके सुरक्षा सुदृढ़ की गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि ये उग्रवादी समूह जातीय हिंसा में शामिल हो गए थे। राज्य में लगभग 10,000 सेना, अद्र्ध-सैन्य और केंद्रीय पुलिस बलों को तैनात किया गया है, जहां बहुसंख्यक मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के कदम के खिलाफ बुधवार को कुकी और नगा सहित आदिवासियों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के बाद दंगा भडक़ गया था।

कुल आबादी में मेइती समुदाय करीब 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासियों में नगा और कुकी शामिल हैं और आबादी में इनकी संख्या करीब 40 प्रतिशत है और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं। इस बीच, असम राइफल्स की एक टुकड़ी को इंफाल में सभी नगा छात्रों को रविवार को वापस कोहिमा ले जाने के लिए चुनिंदा जगहों से एकत्रित करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि आधिकारिक मृतक संख्या 54 हैं जिनमें से 16 शव चुराचांदपुर जिला अस्पताल के मोर्चरी में रखे गए हैं, जबकि 15 शव इंफाल पूर्वी जिले के जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान में रखे गए हैं।

अधिकारी ने कहा कि इंफाल पश्चिम जिले के लाम्फेल में क्षेत्रीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान ने 23 लोगों के मारे जाने की सूचना दी है। पुलिस ने बताया कि चुराचांदपुर जिले में शुक्रवार रात दो अलग-अलग मुठभेड़ों में पांच उग्रवादी मारे गए और इंडिया रिजर्व बटालियन के दो जवान घायल हो गए। पुलिस ने कहा कि चुराचांदपुर जिले के सैटन में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच एक मुठभेड़ हुई, जिसमें चार उग्रवादी मारे गए। पुलिस ने बताया कि टोरबंग में उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं, जिसके चलते सुरक्षा बलों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस ने बताया कि जवाबी कार्रवाई में एक आतंकवादी मारा गया और आईआरबी के दो जवान घायल हो गए। एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सेना ने चुराचांदपुर, मोरेह, काकचिंग और कांगपोकपी जिलों को अपने नियंत्रण में ले लिया है।

पीआरओ ने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया के कारण हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों के विभिन्न अल्पसंख्यक इलाकों से सभी समुदायों के नागरिकों को निकाला गया। नतीजतन, चुराचांदपुर, कांगपोकपी, मोरेह और काकचिंग अब पूरी तरह से नियंत्रण में हैं और कल रात से किसी बड़ी हिंसा की सूचना नहीं है। रक्षा अधिकारी ने कहा कि कुल लगभग 13,000 नागरिकों को प्रभावित क्षेत्रों से निकाला गया है और वर्तमान में अस्थायी आश्रय स्थलों में रखा गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और शीर्ष अधिकारियों के साथ मणिपुर में स्थिति की समीक्षा की, वहीं केंद्र ने शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल और दंगा रोधी वाहनों को भेजा है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के एक प्रवक्ता ने कहा कि मणिपुर जाने वाली ट्रेनों को शुक्रवार से तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। मणिपुर में बहुसंख्यक मेइती समुदाय की उसे अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर’ (एटीएसयूएम) की ओर से बुधवार को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान चुराचांदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में हिंसा भडक़ गई थी।

नगा और कुकी सहित अन्य आदिवासी समुदायों की ओर से इस मार्च का आयोजन मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा पिछले महीने राज्य सरकार को मेइती समुदाय की एसटी दर्जे की मांग पर चार सप्ताह के भीतर केंद्र को एक सिफारिश भेजने का निर्देश देने के बाद किया गया था। पुलिस के अनुसार, तोरबंग में मार्च के दौरान हथियारबंद लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर मेइती समुदाय के सदस्यों पर हमला किया। जवाबी हमले किए, जिससे पूरे राज्य में हिंसा फैल गई।

वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि हिंसा प्रभावित मणिपुर में फंसे राज्य के लोगों को निकालने के प्रयास जारी हैं। पूर्वोत्तर राज्य में हिंसक झड़पों पर चिंता व्यक्त करते हुए बनर्जी ने मुख्य सचिव एच के द्विवेदी से स्थिति की निगरानी करने और फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने ट्वीट किया कि मणिपुर से हमें जिस तरह के संदेश मिल रहे हैं, उससे गहरी पीड़ा हुई है।

मैं मणिपुर के लोगों और देश के विभिन्न हिस्सों के अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं, जो अब वहां फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार लोगों के साथ प्रतिबद्धता से खड़ी है और मणिपुर सरकार के साथ समन्वय से वहां फंसे लोगों को निकालने के लिए हर संभव प्रयास करने का फैसला किया है। मुख्य सचिव को पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने तथा लोगों की मदद करने का निर्देश दिया गया है।

हम हर समय लोगों के साथ हैं। सभी से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हैं। इस बीच नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू ने शनिवार को मणिपुर की महिलाओं से संघर्षग्रस्त राज्य में शांति स्थापना के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने महिलाओं से कहा कि अपनी जातीय पहचान की परवाह किये बगैर वे राज्य में शांति कायम करने के लिए काम करें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से भी मणिपुर का दौरा करके ‘समस्या को समझने’ और ‘इसका समाधान करने’ का अनुरोध किया। शर्मिला को मणिपुर की ‘लौह महिला’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने टेलीफोन पर  दिये साक्षात्कार में कहा कि मणिपुर जल रहा है और मैं अपने लोगों की तकलीफों को देखकर बहुत दुखी हूं।