गुवाहाटी : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की 11 मई को असम की प्रस्तावित यात्रा सोमवार को 26 मई के लिए टाल दी गई क्योंकि वह हिंसा प्रभावित मणिपुर में कानून व्यवस्था की मौजूदा स्थिति से निपटने में व्यस्त हैं। मुख्यमंत्री  डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने यह जानकारी दी।  आबादी के मामले में पूर्वोत्तर के सबसे बड़े राज्य में हिमंत सरकार के दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शाह के 11 मई को असम की यात्रा करने का कार्यक्रम था। मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि शाह ने अपनी यात्रा टाले जाने के बारे में सोमवार सुबह उन्हें सूचना दी। शर्मा ने कहा कि इसलिए, सरकारी नौकरियों के लिए 45,000 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र वितरित करने का कार्यक्रम 26 मई के लिए टाल दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि मणिपुर में जनजातीय और गैर-जनजातीय लोगों के बीच पिछले हफ्ते हुई झड़पों में कम से कम 54 लोग मारे गये हैं और 23,000 से अधिक लोग बेघर हो गये। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह में और 10,000 नौकरी के विज्ञापन निकाले जाएंगे। कृषि और शिक्षा विभागों में कई और रिक्तियां हैं। सीएम ने  कहा कि असम पुलिस, वन और आबकारी विभाग की नौकरियों के नतीजे आज सुबह घोषित किए गए। एलपी, एमई स्कूल शिक्षक नौकरियों के नतीजे आज आधी रात तक घोषित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों का परिणाम 10 मई को घोषित किया जाएगा। चौथी श्रेणी के करीब 1,900 पदों की भर्ती परीक्षा के नतीजे अभी घोषित होने बाकी हैं। ये सभी नतीजे 14 जून तक घोषित किए जाएंगे। इस बीच,ओवरलैपिंग के संबंध में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व में भर्ती किए गए 41,920 पदों में कहीं भी कोई ओवरलैप नहीं हुआ है।

अगर ओवरलैपिंग होगा भी तो 4-5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। भर्ती के लिए 1 जून से 15 जून तक ज्वाइनिंग डेट दी जाएगी। 15 जून के बाद ही पता चलेगा कि कितनी नौकरी में शामिल हुए और कितने नहीं। सीएम ने कहा कि  हम नौकरी में शामिल होने वालों के नाम और पते के साथ 1,00,000 लोगों की एक निर्देशिका प्रकाशित करेंगे। पत्रकार घर-घर जाकर जांच कर सकते हैं। गौरतलब है कि 2005 में पिछली तरुण गोगोई सरकार ने एफआरबीएम अधिनियम पास करके नौकरियों में प्रतीक्षा सूची की व्यवस्था को समाप्त कर दिया था। अगर कोई इस कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल होगी।