गुवाहाटी : असम पुलिस ने 650 से अधिक कर्मियों की एक सूची तैयार की है, जो कथित तौर पर शराब पीने के आदी हैं या मोटापे से ग्रस्त हैं। ऐसे लोगों तथा गहन समीक्षा के बाद ड्यूटी के लिए अनुपयुक्त पाए गए जाने वालों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की पेशकश की जाएगी। यह जानकारी असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जीपी सिंह ने सोमवार को यहां दी। डीजीपी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पुलिस से ‘अनुपयुक्त लोगों’ से छुटकारा पाने की कवायद बल के सभी संगठनों और शाखाओं में की जाएगी। सिंह ने कहा कि हमारे पास पहले से ही लगभग 680 व्यक्तियों की एक सूची है। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि बिना तार्किक आधार के कोई नाम न जोड़ा जाए, हमने बटालियन और जिलों में समितियों का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता एक डिप्टी कमांडेंट या एक अतिरिक्त एसपी-रैंक अधिकारी करेंगे। उन्होंने कहा कि ये समितियां जिला पुलिस अधीक्षकों (एसपी) या बटालियन कमांडेंट को अपनी रिपोर्ट देंगी, जो फिर इसे पुलिस मुख्यालय में जमा करेंगे।
सिंह ने कहा कि सूची की फिर से एक समिति द्वारा समीक्षा की जाएगी, जिसमें प्रशिक्षण और सशस्त्र पुलिस इकाई के साथ-साथ कानून व्यवस्था और प्रशासन के लोग होंगे। सिंह ने कहा कि समिति अंत में उन कर्मियों की सूची तैयार करेगी, जिन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश की जाएगी। उन्होंने कहा कि सूची तैयार करने की प्रक्रिया को इस तरह से सुव्यवस्थित किया जा रहा है ताकि किसी गलत व्यक्ति को वीआरएस की पेशकश न की जाए और इसलिए नामों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में कुछ समय लगेगा। सिंह ने कहा कि जिन लोगों के नाम सूची में हैं, लेकिन वीआरएस लेने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें कम से कम ‘फील्ड ड्यूटी’ नहीं दी जाएगी। शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमने पुलिस के अन्य संगठनों के साथ बैठक की और उन्हें इसी तरह की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
डीजीपी ने कहा कि राज्य पुलिस बल की कुल संख्या लगभग 70,000 है। उन्होंने कहा कि आईपीएस स्तर के अधिकारियों सहित पुलिस अधिकारियों को फिटनेस बनाए रखने के लिए कहा गया है ताकि वे उदाहरण पेश कर सकें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इसके लिए तीन-चार महीने का समय दिया गया है। वहीं मणिपुर के संदर्भ में असम के डीजीपी बताया कि राज्य के नागरिकों को मदद उपलब्ध कराने अथवा वहां से निकलने में उनकी सहायता करने के लिए पुलिस की एक टीम हिंसा-प्रभावित मणिपुर राज्य में पहुंच गई है। सिंह ने बताया कि मणिपुर में रह रहे असम के ज्यादातर लोग वहां से लौटने के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन राज्य सरकार वहां फंसे लोगों तक पहुंच बनाने और आवश्यकतानुसार उनकी मदद के हरसंभव प्रयास कर रही है। डीजीपी ने कहा कि कुछ लोग वापस आ रहे हैं, लेकिन ज्यादातर लोग लौटना नहीं चाहते। हम उन्हें मदद कर रहे हैं जो (अपने गृह राज्य) लौटना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) स्तर के एक अधिकारी के नेतृत्व में चार-सदस्यीय एक पुलिस टीम पहले ही मणिपुर पहुंच चुकी है। सिंह ने कहा कि टीम वैसे लोगों को हवाई अड्डा पहुंचने में मदद कर रही है, जो (असम) वापस आना चाहते हैं। कुछ लोग पहले ही पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ आज की उड़ान से आ रहे हैं। डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मणिपुर में पिछले सप्ताह हिंसा भड़कने के तत्काल बाद वहां फंसे असम के लोगों से संपर्क स्थापित करने तथा हरसंभव सहयोग देने का उन लोगों को निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन नंबर चालू कर दिए गए हैं और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।