इंफाल : मणिपुर में हिंसा थम गई। इसी के साथ जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। इस बीच, खुफिया सूत्रों से पता चला है कि हिंसा की साजिश की बड़ी वजह म्यामां के उग्रवादी हैं। दरअसल, म्यामां से 50 हजार से ज्यादा कुकी-मिजो-चिन समूह के लोग और रोहिंग्या मिजोरम में घुस चुके हैं। इनमें उग्रवादी समूहों के कैडर भी शामिल हैं। खुफिया रिपोट्र्स के मुताबिक, इन लोगों की शारीरिक बनावट और भाषा-बोली स्थानीय लोगों जैसी ही है। इस वजह से इनकी अलग से पहचान नहीं हो पा रही है।। ये सुरक्षाबलों की नजरों से बच रहे हैं।
इसका फायदा उठाकर कुकी समुदाय के लोग पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी घुस गए हैं। म्यामां से मिजोरम में घुसे इन लोगों को राज्य सरकार शरण देने के साथ पहचान पत्र के जरिए सभी सरकारी सुविधाएं दे रही है। हालांकि, केंद्र लगातार इन्हें शरणार्थी का दर्जा देने से मना कर रहा है। ये कथित शरणार्थी अघोषित तौर पर मिजोरम के नागरिक बन चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी घुसपैठियों की समस्या की भनक है। म्यामां के सगियांग और चिन प्रांत मणिपुर के साथ करीब 398 किमी की सीमा साझा करते हैं। इस सीमा क्षेत्र से मणिपुर के टेंग्नोउपाल, चंदेल, उखरुल, काम्जोंग और चूराचांदपुर जिले जुड़े हुए हैं।
हाल ही में चूराचांदपुर सहित सबसे ज्यादा हिंसा इन्हीं जिलों में हुई है। जिस दिन हिंसा हुई, उस दिन सफेद बोलेरो में लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की, उनके तार उग्रवादी समूह से जुड़े हैं। सीएम बीरेन सिंह ने कहा कि हिंसा के जिम्मेदार संगठनों और कथित बाहरी लोगों की जांच होगी। इस बीच, मोबाइल इंटरनेट 13 मई तक बंद रहेगा। हिंसा के दौरान 1041 रायफल और 7,460 कारतूस लूट लिए गए थे। कार्रवाई के बाद 214 हथियार, 4273 कारतूस बरामद किए जा चुके हैं।