गुवाहाटी : राजीव भवन ने गठबंधन के लिए दरवाजे पूरी तरह से बंद कर देने के बाद एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने शुक्रवार को पटना पहुंचे और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रखा। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने आगामी लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। अजमल ने मोर्चा में शामिल होने के प्रस्ताव के साथ नीतीश कुमार से मुलाकात की। अजमल शुक्रवार सुबह पटना पहुंचने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर गए। दोनों राजनीतिक नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बैठक चली। बैठक में असम के ताजा राजनीतिक हालात पर भी चर्चा हुई। बैठक में 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले भाजपा विरोधी गठबंधन में एआईयूडीएफ को शामिल करने पर भी सहमति बनी, लेकिन बदरुद्दीन अजमल की ताजा हरकतों ने राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजीव भवन पहले ही एआईयूडीएफ गठबंधन को पूरी तरह खारिज कर चुका है। राजीव भवन की ऐसी स्थिति के बाद अजमल ने लगातार कांग्रेस आलाकमान को कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन अजमल इसमें भी नाकाम रहे। राजीव भवन के साथ कांग्रेस आलाकमान ने भी अजमल से गठबंधन के दरवाजे बंद कर दिए। इसलिए, अजमल ने अपने राजनीतिक अस्तित्व की रक्षा के लिए कांग्रेस के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक नीतीश कुमार की ओर रुख किया। कांग्रेस पार्टी बार-बार आरोप लगाती रही है कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा व भाजपा के साथ अजमल का गुप्त समझौता चल रहा है। राजीव भवन को विश्वास है कि अजमल ने हाल के कई चुनावों में गठबंधन के नाम पर कांग्रेस को धोखा दिया है।
कांग्रेस ने विश्वासघात को पूरी तरह से पूर्वनियोजित होने का गंभीर आरोप लगाया है। इसलिए कांग्रेस द्वारा खारिज किए जाने के बाद अजमल चतुराई से नीतीश कुमार का सहारा लेकर भाजपा विरोधी महागठबंधन में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामले में अजमल ने असम में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस से सौदेबाजी की रणनीति बनाई है। अजमल को उम्मीद है कि महागठबंधन के तहत कांग्रेस को अजमल के साथ सीटों पर बातचीत करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। शायद परोक्ष रूप से अजमल कांग्रेस से मिले अपमान का बदला लेने की रणनीति बना रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस की क्या स्थिति होती है यह तो समय ही बताएगा। अजमल महागठबंधन के जरिए कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाना चाह सकते हैं।