डिजिटल डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं और उनका मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना लगभग तय हो चुका है।  Karnataka में मुख्यमंत्री की रेस में डीके शिवकुमार भी शामिल थे, मगर अब उन्हें डिप्टी सीएम के पद से संतोष करना पड़ सकता है और हालांकि, शिवकुमार को सिर्फ डिप्टी सीएम का ही पद नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें राज्य में महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो सौंपे जा सकते हैं तथा सिद्धारमैया गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

कांग्रेस को जब से कर्नाटक में बहुमत हासिल हुआ है, तभी से इस बात की चर्चा हो रही थी कि राज्य की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी और डीके शिवकुमार ने पिछले 5 सालों के दौरान पार्टी संगठन को मजबूत किया और फिर कैडर में जान फूंकते हुए कांग्रेस की वापसी कराई है अब  ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस पार्टी उन्हें उनकी मेहनत का फल देते हुए कर्नाटक का मुख्यमंत्री बना सकती है। मगर अब ताज सिद्धारमैया के सिर पर सजने वाला है और  ऐसे में आइए उन वजहों के बारे में जानते हैं, जिनके चलते सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

किन वजहों से सिद्धारमैया बन सकते हैं मुख्यमंत्री?

सिद्धारमैया को सीएम बनाने की अगर पहली वजह की बात करें, तो वह कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेता माने जाते हैं, वह राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। अगर वर्तमान स्थिति की बात करें, तो उनके पास सबसे ज्यादा विधायकों का समर्थन है और  सिद्धारमैया को गांधी परिवार का भरोसमंद भी माना जाता है और सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि उनका सभी क्षेत्रों और राजनीतिक दलों में अच्छा खासा प्रभाव भी है।

दूसरी वजह ये है कि कांग्रेस का मानना है कि कर्नाटक की कमान कुरुबा समाज के नेता के पास हो। सिद्धारमैया कुरुबा जाति से आते हैं, जिनके जमीनी स्तर पर प्रभावशाली वोकालिग्गा समुदाय से अच्छे रिश्ते हैं, अब ऐसे में कांग्रेस चाहती है कि 2024 में लोकसभा चुनाव तक कुरुबा समाज के नेता के पास ही सीएम पद हो। पार्टी शिवकुमार और सिद्धारमैया की जोड़ी को साथ रखते हुए राज्य में ज्यादा सीटें हासिल करना चाहती है।

सिद्धारमैया के नाम पर मुहर लगाने की तीसरी वजह ये है कि उनके पास सरकार चलाने का अनुभव है और वह 2013-18 तक राज्य के सीएम रहे हैं। उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत 1983 में हुई, जब वह निर्दलीय विधायक चुने गए तथा सिद्धारमैया 1994 में जनता दल सरकार में डिप्टी सीएम बने। हालांकि, फिर एचडी देवगौड़ा के विवाद के बाद उन्होंने जेडीएस का साथ छोड़ा और 2006 में कांग्रेस का हाथ थाम लिया।

कांग्रेस द्वारा सिद्धारमैया को सीएम चुनने की चौथी वजह उनका राजनीतिक इतिहास है और सिद्धारमैया OBC के कुरुबा समुदाय के बड़े नेता हैं। 40 साल में वह एकमात्र मुख्यमंत्री हैं, जिसने अपना कार्यकाल पूरा किया है तथा उनके पास 13 बजट पेश करने का अनुभव है।सीएम रहते उन्होंने गरीबों के लिए कई योजनाएं चलाईं, जिसकी वजह से एक बड़े तबके को विश्वास है कि वह सीएम पद के लिए एकदम परफेक्ट च्वाइस हैं।

सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाने की पांचवीं वजह उनकी छवि है और  कांग्रेस नेता सिद्धारमैया के ऊपर भ्रष्टाचार का कोई भी मामला नहीं है। दूसरी ओर, डीके शिवकुमार के ऊपर ईडी ने केस दर्ज किया हुआ है, जिस वजह से उनकी दावेदारी कमजोर हुई है और वहीं, भ्रष्टाचार और कमीशन के मुद्दे पर चुनाव लड़कर जीतने वाली कांग्रेस एक साफ-सुथरी छवि वाले नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है।

अगर छठी वजह की बात की जाए, तो वह है सिद्धारमैया की सोशल इंजीनियरिंग ताथा सिद्धारमैया ने ‘अहिंदा’ फॉर्मूला के जरिए अल्पसंख्यातारु (अल्पसंख्यक), हिंदूलिद्वारू (पिछड़ा वर्ग) और दलितारु (दलित वर्ग) को कांग्रेस के साथ जोड़ा है। राज्य की 61 फीसदी आबादी इन्हीं तीनों वर्गों से है और इस फॉर्मूले के जरिए ही उन्होंने कर्नाटक की जनता में अपनी पैठ बनाई हुई है।