डिजिटल डेस्क: भारत और चीन के बीच चल रहे सैन्य गतिरोध को हल करने के लिए मंगलवार को लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में मेजर जनरल स्तर की वार्ता हुई और बैठक में बॉर्डर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। पिछले महीने, भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी गतिरोध को हल करने के लिए पूर्वी लद्दाख सेक्टर में कोर कमांडर लेवल की वार्ता हुई और गतिरोध के बाद से यह 18वें दौर की बैठक थी।
भारत की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल रशीम बाली ने किया था और दूसरी ओर पड़ोसी मुल्क की ओर से भी इसी रैंक के अधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और यह बैठक इसलिए काफी अहम थी क्योंकि यह शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठर से ठीक पहले हुई थी। दिल्ली में हुई इस बैठक में चीन के रक्षा मंत्री ली शांगफू ने भी हिस्सा लिया था और दोनों पक्षों में अहम मुद्दों पर चर्चा की।
बॉर्डर गतिरोध को खत्म करने के लिए बातचीत के अलावा दोनों देश खुद को मजबूत करने के लिए बॉर्डर इलाके में बनियादी ढांचे का तेजी से विकास भी कर रहे हैं और मंगलवार को हुई बैठक में दोनों देश उन मुद्दों को सुलझाने में सफल भी रहे हैं जिन्हें पिछली बैर की बैठक में उठाया गया है।
सितंबर 2022 में डिसइंगेजमेंट पर राजी हुई थे दोनों देश:
एलएसी पर दोनों देशों के बीच जारी तनाव में उस समय कमी देखने को मिली जब सितंबर 2022 में दोनों पक्ष ने पैट्रोलिंग पॉइंट-15 से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया था और सैनिकों की यह वापसी 17 जुलाई, 2022 को हुई कोर कमांडर स्तरीय वार्ता के बाद हुई थी। इस बैठक में ही दोनों देशों ने अपने-अपने सैनिकों को हटाने का फैसला किया था।
एससीओ की बैठक के दौरान देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बॉर्डर से जुड़े मुद्दे को चीनी समकक्ष के सामने भी उठाया था तथा रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कहा था कि मौजूदा उल्लंघन ने द्विपक्षीय संबंधों को खत्म कर दिया है और जबकि भारत और चीन संबंधों का विकास बॉर्डर पर शांति पर आधारित है।