डिजिटल डेस्क: मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में एक बड़ा फेरबदल हुआ है तथा केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का मंत्रालय बदलकर अर्थ साइंस दिया गया है और वहीं उनकी जगह पर अर्जुन राम मेघवाल को कानून राज्य मंत्री सौंपा गया है। कानून मंत्रालय छिनने के बाद किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है और उन्होंने कहा कि कानून और न्याय मंत्री के रूप में काम करना एक विशेषाधिकार और सम्मान की बात हैं।उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूड़, सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों, मुख्य न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के जज, निचली न्यायपालिका और पूरे कानून अधिकारियों को धन्यवाद दिया है और उन्होंने ये भी कहा है कि अर्थ साइंस मंत्रालय के लिए भी वो पूरे जोश औऱ उत्साह के साथ काम करेंगे।
रिजिजू का सुप्रीम कोर्ट के साथ बीते काफी वक्त से विवाद चल रहा था और वो जजों की नियुक्ति के लिए बने कॉलेजियम सिस्टम से नाखुश थे। कई ओपन फोरम में वो अपनी ये नाराजगी जाहिर कर चुके थे तथा दिल्ली हाई कोर्ट के एक जज की नियुक्ति को लेकर भी मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने आ गया था और अब जब उनका मंत्रालय बदल दिया गया है तो विपक्ष भी मजे ले रहा है।
किरेन रिजिजू का मंत्रालय बदलने पर कांग्रेस नेता अलका लांबा ने ट्वीट कर सरकार को निशाने पर लिया है और उन्होंने कहा कि कानून मंत्री के तौर पर किरेन रिजिजू लगातार टिप्पणियां कर रहे थे। वो जजों की नियुक्ति और अदालतों के काम काज के तरीकों पर सवाल उठा रहे थे और उन पर हस्तक्षेप लगाने की कोशिश कर रहे थे तथा उनकी इस हरकत ने मोदी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ीं कर दी थीं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी छवि के लिए कानून मंत्री की बलि देकर अच्छा किया और राज्य सभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी रिजिजू का मंत्रालय बदलने पर मजे लिए हैं। उन्होंने कहा है कि किरेन रिजिजू अब तो कानून मंत्री नहीं रहे और उनको अब अर्थ साइंस मंत्रालय सौंप दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि नियमों के पीछे का साइंस समझना आसान नहीं है और अब तो वो (रिजिजू) साइंस के नियमों के साथ छेड़छाड़ करेंगे।
शिवसेना राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस फैसले पर ट्वीट किया है। हालांकि उन्होंने अपने ट्वीट में कहीं भी किसी के नाम का जिक्र नहीं किया। उन्होंने लिखा है कि क्या ऐसा महाराष्ट्र के फैसले पर शर्मिंदगी के कारण हुआ या फिर मोदानी-सेबी जांच के कारण तथा सुप्रीम कोर्ट और किरेन रिजिजू का रंज काफी दिनों से चल रहा था। कॉलेजियम को लेकर रिजिजू की कुछ आपत्तियां थीं और वो चाहते थे जजों की नियुक्तियों पर सरकार का दखल हो, मगर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि जजों के चयन के लिए कॉलेजियम से अच्छा कोई विकल्प नहीं है।