डिजिटल डेस्क: इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान में जिसने भी सेना से पंगा लिया, उसे या तो जेल मिली है या फिर देश छोड़कर भागना पड़ा है और  अब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर आर्मी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। कहा जा रहा है कि उन्हें अल्टीमेटम दिया गया है कि वो या तो लंदन चले जाएं या फिर मुकदमे का सामना करें तथा  इमरान पहले नेता नहीं होंगे, जिन्हें लंदन भागना पड़ सकता है। पाकिस्तानी नेताओं का ‘लंदन प्रेम’ बेहद पुराना है।

लंदन में कई इलाकों को देख आपको ‘मिनी पाकिस्तान’ होने का गुमान हो सकता है और  यहां इतने पाकिस्तानी नेता और सेना के विरोधियों ने शरण ली हुई है कि अगर आप घूमने निकलेंगे तो कुछ तो आपके पड़ोसी ही निकल जाएंगे। बेनजीर भुट्टो हों या परवेज मुशर्रफ या फिर नवाज शरीफ, हर किसी ने लंदन को अपना ‘घर’ बनाया है। लेकिन आखिर लंदन ही क्यों? पहले बात करते हैं कि उन पाकिस्तानी नेताओं की, जो देश से निकाले गए तो सीधे लंदन ही पहुंचे।

बेनजीर भुट्टो ने रेंट पर लिया था फ्लैट: 

पाकिस्तान के पूर्व पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी और खुद प्रधानमंत्री रहीं बेनजीर भुट्टो ने लंदन को ही एक तरह से अपना गैर आधिकारिक ऑफिस बना लिया था और 1979 में पिता को फांसी मिलने के बाद उन्हें और उनकी मां को गिरफ्तार कर लिया गया। करीब एक साल बाद छूटी, लेकिन 1981 में बेनजीर को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. जेल के बाद करीब दो साल तक हाउस अरेस्ट में रहीं है। अमेरिका का दबाव बढ़ा तो 1984 में सेना ने बेनजीर को जिनेवा की फ्लाइट में बैठा दिया।

जिनेवा से बेनजीर सीधे लंदन चली गईं, जहां उन्होंने किराए पर एक फ्लैट ले लिया और  साथ ही उन्होंने अपनी बीमारी का इलाज भी कराया। धीरे-धीरे बेनजीर ने इसी फ्लैट को अपना पार्टी ऑफिस बना लिया. 1985 में पाकिस्तान लौटीं, लेकिन 90 के दशक में उन्हें फिर से लंदन में शरण लेनी पड़ी तथा 2007 में मौत से एक साल पहले तक भी वह लंदन में ही थीं।

नवाज शरीफ और बेनजीर बने पड़ोसी:

पाकिस्तान में एक-दूसरे के खिलाफ बोलने वाले बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ लंदन में अच्छे पड़ोसी बन गए और 1999 में जब मुशर्रफ ने सत्ता पर कब्जा किया तो नवाज शरीफ ने भी लंदन में ही शरण ली और 10 साल की जेल के बदले वह सेना के लंदन चले जाने के प्रस्ताव पर राजी हो गए। साल 2000 में वह लंदन चले गए तथा 2007 में वापस लौटे, लेकिन 2019 में जब इमरान सरकार आई तो उन्हें फिर से उलटे पांव लौटना पड़ा और  हालांकि वह लंदन से ही पार्टी चलाते रहे और भाई-बेटी के जरिए सत्ता में वापस आ गए।

परवेज मुशर्रफ:

जिस परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को लंदन भेजा, बाद में वही पूर्व सेना अध्यक्ष को उनका पड़ोसी बनना पड़ा। 2008 के बाद पासा पलट चुका था तथा नवाज शरीफ अब प्रधानमंत्री थे और मुशर्रफ को लंदन जाना पड़ा और हालांकि अपने आखिरी दिनों में वह दुबई चले गए, जहां गुमनामी में रहते हुए दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके अलावा भी कई पाकिस्तानी नेताओं ने लंदन में शरण ली है।

आखिर लंदन ही क्यों:

अब सवाल उठता है कि आखिर लंदन ही क्यों? दरअसल अपने देश में ‘अपराधी’ साबित होने के बाद लंदन एक सुरक्षित ठिकाना साबित होता है और ब्रिटेन के कानून ऐसे हैं, जो शरणार्थियों को बचाते हैं। ब्रिटेन का प्रत्यर्पण कानून अपने यहां आने वाले लोगों को बचाने का मौका देता है तथा इसी के आर्टिकल 9 में ऐसे चार प्रावधान हैं, जो शरण लेने वाले को यहां रहने की आजादी देते हैं। इसके अलावा यहां मानवाधिकार एक्ट भी काफी सख्त है और यह एक्ट प्रत्येक नागरिक के 15 मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।