डिजिटल डेस्क: ओशनोग्राफी को लेकर मेरा इंटरेस्ट रहा है और अभी से नहीं स्कूल के जमाने से, बहुत अच्छा काम करने का मौका मिला है। प्रधानमंत्री का धन्यवाद’ केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का कहना है। एक दिन पहले ही इनको लॉ मिनिस्टर से हटा कर अर्थ साइंस मंत्रालय सौंप दिया है और राजनीतिक बयान बाजी हो रही है। विपक्ष के कई नेता उनके मजे ले रहे हैं, मगर उन्होंने ये साफ कर दिया है कि इसमें भी उनकी रुचि है और वो अच्छा काम करेंगे। उनकी जगह राजस्थान के बीकानेर से सांसद अर्जुन राम मेघवाल को लॉ मिनिस्टर बनाया गया है।
किरेन रिजिजू का मंत्रालय बदलने के पीछे उनका सुप्रीम कोर्ट से विवाद बताया जा रहा है। बीते कुछ महीनों से लगातार वो कॉलेजियम को लेकर बात कर रहे थे और कई ओपन फोरम में भी खुल के इसको लेकर आपत्ति जाहिर कर चुके थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम सिस्टम से ही जजों का चुनाव किया जाता है। रिजिजू का कहना था कि इसमें सरकार की भी भागीदारी होनी चाहिए, तथा रिजिजू ने आज पदभार संभाल लिया है।
बड़ा रोल निभा सकता है ये मंत्रालय:
उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी भी दी थी तथा उन्होंने कहा कि मैंने इस मंत्रालय के बारे में जानने की कोशिश की, मैंने पाया कि ये बहुत दिलचस्प है। आज के वक्त में बहुत ही उपयोगी भी है और यहां पर हम बहुत सारा काम कर सकते हैं।उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को शुक्रिया अदा करते हुए ये भी कहा कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने में ये मंत्रालय बड़ा रोल निभा सकता है।
स्कूल टाइम से रुचि:
रिजिजू ने कहा कि गूगल अर्थ ओशनोग्राफी को लेकर छोटे से ही उनका इंटरेस्ट रहा है और वो इसको जानने समझने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि स्कूल टाइम से ही उनका रुझान साइंस की तरफ रहा है तथा उनको ये मंत्रालय मिला है यहां पर काम करने का अच्छा मौका है। रिजिजू को नॉर्थ इंडिया की आवाज कहा जाता है और कम उम्र में वो सांसद बने। प्रधानमंत्री मोदी के करीब भी आए और अपने क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ भी है, और उनका स्वभाव तेजतर्रार वाला है।
मेरी तारीफ नहीं कर सकता विपक्ष- रिजिजू
रिजिजू का कहना है कि आम लोगों को इस मंत्रालय के करीब लाने के लिए काम करेंगे और ये वक्त राजनीतिक बातचीत वाला नहीं है। उन्होंने आगे यह कहा कि विपक्ष का काम है अटैक करना। वो मुझपर हमला करेंगे,वो मेरी तारीफ नहीं कर सकते। उन्होंने सभी आरोपों का भी खंडन करते हुए कहा कि मंत्रालय में कोई गलती नहीं हुई और ये तो प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। वो फैसला लेते हैं कि उनको अपने मंत्रिमंडल में किसे चाहिए किसे नहीं और किसे कौन सा मंत्रालय दिया जाना चाहिए।